नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल जारी है। ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 102 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है।
दिनभर के कारोबार में तेजी का रुख
ब्रेंट क्रूड ने 108 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कारोबार की शुरुआत की और मामूली गिरावट के बाद तेज उछाल लेते हुए 112.52 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। शाम 6:30 बजे तक यह 2.95 डॉलर (2.73%) की बढ़त के साथ 111.16 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड 96.62 डॉलर से खुलने के बाद तेजी पकड़ते हुए 101.85 डॉलर तक पहुंच गया। कारोबार के दौरान यह 4.55 डॉलर (4.72%) की उछाल के साथ 100.91 डॉलर प्रति बैरल पर बना रहा।
पश्चिम एशिया तनाव बना मुख्य कारण
विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधित होने से कीमतों पर दबाव बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता टलने और टकराव की स्थिति ने वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है।
वैश्विक सप्लाई पर बड़ा असर
दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट के जरिए होती है। मौजूदा हालात में इस मार्ग के प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। फरवरी के अंत से जारी तनाव के कारण तेल की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है, खासकर डब्ल्यूटीआई क्रूड में करीब 70 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहीं तो भारत पर इसका असर पड़ेगा। इससे करंट अकाउंट डेफिसिट और फिस्कल डेफिसिट बढ़ सकता है, साथ ही महंगाई और रुपये पर दबाव भी बढ़ेगा।
टीएनवी फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ तारकेश्वर नाथ वैष्णव के अनुसार, बढ़ती तेल कीमतों के कारण विदेशी निवेश में कमी और शेयर बाजार में अस्थिरता भी देखने को मिल सकती है।
इंफ्रास्ट्रक्चर बहाली में लगेगा समय
जानकारों का कहना है कि भले ही सीजफायर की कोशिशें जारी हैं, लेकिन ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह बहाल करने में समय लगेगा। बंद पड़े तेल कुओं को दोबारा शुरू करने, सप्लाई चेन को बहाल करने और रिफाइनरी स्टॉक सामान्य करने में लंबा वक्त लग सकता है।






