सिलीगुड़ी में ‘न्याय संहिता प्रदर्शनी’ का उद्घाटन, अमित शाह बोले- बंगाल में अब ‘डर नहीं, भरोसे की सरकार’ का होगा शासन

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सिलीगुड़ी, 21 अगस्त। उत्तर बंगाल के प्रवेशद्वार सिलीगुड़ी में नए आपराधिक कानूनों के प्रति आम लोगों को जागरूक करने के लिए शुक्रवार को ‘न्याय संहिता प्रदर्शनी’ का शुभारंभ हुआ। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कावाखाली मैदान में ‘5 स्तंभ : बदली हुई न्याय व्यवस्था’ थीम पर आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। यह प्रदर्शनी 21 से 26 अगस्त तक चलेगी।

नए आपराधिक कानूनों की जानकारी देने पर जोर

प्रदर्शनी का उद्देश्य पुराने भारतीय दंड संहिता (1860), दंड प्रक्रिया संहिता (1973) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (1872) की जगह लागू किए गए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) के प्रमुख प्रावधानों और बदलावों को आम लोगों तक सरल तरीके से पहुंचाना है।

उद्घाटन के बाद अमित शाह ने प्रदर्शनी के विभिन्न स्टॉल का जायजा लिया। कार्यक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार, मंत्री निशीथ प्रमाणिक, दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट समेत कई वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। जलपाईगुड़ी, इस्लामपुर और दार्जिलिंग के विभिन्न स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थियों को भी प्रदर्शनी में लाया गया।

‘नए कानून से खत्म होगा भय का माहौल’

खुले मंच से संबोधित करते हुए अमित शाह ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि देशभर में नए आपराधिक कानूनों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी, लेकिन पश्चिम बंगाल में इसकी अधिसूचना जारी नहीं की गई।

शाह ने आरोप लगाया कि नए कानून लागू होने से सिंडिकेट, धन उगाही और भय का माहौल खत्म होगा। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान भाजपा ने बंगाल की जनता से ‘डर की नहीं, भरोसे की सरकार’ देने का वादा किया था।

शाह के मुताबिक, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पद संभालने के बाद जिन शुरुआती फाइलों पर हस्ताक्षर किए, उनमें तीन नए आपराधिक कानूनों को लागू करने से संबंधित फाइल भी शामिल थी।

तकनीक के इस्तेमाल से जांच और न्याय प्रक्रिया में तेजी

अमित शाह ने नए कानूनों में तकनीक के इस्तेमाल को महत्वपूर्ण बदलाव बताया। उन्होंने कहा कि पुलिस जांच में तकनीक आधारित साक्ष्यों का अधिक इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे जांच और न्याय प्रक्रिया को गति मिलेगी।

उन्होंने जीरो एफआईआर और ई-एफआईआर जैसी व्यवस्थाओं का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, इन प्रावधानों से देश के किसी भी हिस्से में रहने वाले लोगों के लिए शिकायत दर्ज कराना आसान होगा और मामले को संबंधित थाने तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी सरल होगी।

छह साल से अधिक सजा वाले अपराधों में फोरेंसिक जांच पर जोर

गृह मंत्री ने कहा कि छह वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले सभी अपराधों में फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की जांच और रिपोर्ट को अनिवार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि तकनीक, पारदर्शिता और निर्धारित समयसीमा के आधार पर न्याय व्यवस्था में व्यापक बदलाव किया जा रहा है।

शाह ने यह भी कहा कि नए कानूनों के तहत एफआईआर दर्ज होने के बाद तीन वर्ष के भीतर सुप्रीम कोर्ट तक न्यायिक प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

महिला और बच्चों की सुरक्षा को बताया प्राथमिकता

केंद्रीय गृह मंत्री ने महिला और बच्चों की सुरक्षा को नए आपराधिक कानूनों की प्रमुख प्राथमिकताओं में बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और मजबूत जांच व्यवस्था के जरिए अपराधों की जांच को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

अपने संबोधन में अमित शाह ने राज्य में कानून-व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मामलों का उल्लेख करते हुए पूर्ववर्ती सरकार पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि सरकार और कानून में बदलाव के साथ बंगाल में लंबे समय बाद फिर से कानून का शासन मजबूत होगा।

सीएए और घुसपैठ समेत कई मुद्दों का किया उल्लेख

अमित शाह ने अपने संबोधन में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए), घुसपैठ के खिलाफ कार्रवाई, वसूली के खिलाफ हेल्पलाइन नंबर 155334, किसानों को बढ़ी सहायता, सातवें वेतन आयोग और डीए से संबंधित कैबिनेट मंजूरी तथा महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के वादों का भी उल्लेख किया।

कावाखाली मैदान में आयोजित यह प्रदर्शनी 26 अगस्त तक चलेगी। अमित शाह ने लोगों से नए आपराधिक कानूनों को समझने और कानून के शासन को मजबूत करने में सहयोग करने की अपील की।

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