किशनगंज, 21 अगस्त। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पश्चिम बंगाल के तीन दिवसीय दौरे के बीच सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ की सुरक्षा को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। सुरक्षा मामलों से जुड़े अधिकारियों के साथ अमित शाह की उच्चस्तरीय बैठक में किशनगंज के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इस गलियारे की सुरक्षा और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति पर विशेष चर्चा हुई।
किशनगंज में बढ़ी सुरक्षा गतिविधियां
अमित शाह 20 से 22 अगस्त तक पश्चिम बंगाल के दौरे पर हैं। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, इस दौरान सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। किशनगंज इस लिहाज से महत्वपूर्ण है, क्योंकि जिले की सीमा नेपाल और बांग्लादेश से जुड़ती है।
गृह मंत्री के दौरे के मद्देनजर भारत-नेपाल सीमा पर भी सुरक्षा गतिविधियां बढ़ाई गई हैं। सीमा क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भारत-नेपाल सीमा जिला स्तरीय समन्वय समिति (BDCC) की विशेष बैठक आयोजित की गई।
भारत-नेपाल अधिकारियों ने किया मंथन
ठाकुरगंज स्थित सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 19वीं वाहिनी के परिसर में हुई बैठक में किशनगंज के जिलाधिकारी नवीन कुमार और पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। नेपाल की ओर से झापा के प्रमुख जिला अधिकारी शिवराम गेलल और मोरंग के प्रमुख जिला अधिकारी युवराज कटेल ने हिस्सा लिया।
बैठक में नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। दोनों देशों के अधिकारियों ने सीमा सुरक्षा और आपसी समन्वय को मजबूत करने पर चर्चा की।

तस्करी और सीमा पार अपराध रोकने पर जोर
बैठक में भारत-नेपाल सीमा पर अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण, मादक पदार्थों और प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी रोकने तथा संदिग्ध और अवांछित तत्वों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर रणनीति पर चर्चा हुई।
सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियों के बीच सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान सुनिश्चित करने और आर्थिक अपराधों पर अंकुश लगाने पर भी जोर दिया गया। सीमा पार अपराधों की रोकथाम, संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और आपात स्थिति में दोनों देशों की एजेंसियों के बीच तत्काल समन्वय स्थापित करने पर भी सहमति बनी।
क्या है ‘चिकन नेक’?
सिलीगुड़ी कॉरिडोर को ‘चिकन नेक’ के नाम से जाना जाता है। पश्चिम बंगाल में स्थित यह संकरा भूभाग भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को देश के शेष हिस्से से जोड़ने वाला प्रमुख जमीनी संपर्क मार्ग है। इसके सबसे संकरे हिस्से की चौड़ाई करीब 20 किलोमीटर के आसपास बताई जाती है।
यही रणनीतिक स्थिति इस कॉरिडोर को भारत की सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। उत्तर-पूर्व को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले इस मार्ग की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार लगातार विशेष सतर्कता बरतती रही है।






