वाशिंगटन/तेहरान, 15 जुलाई — मध्य पूर्व में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान के प्रमुख बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी शुरू कर दी है और क्षेत्र में 20 से अधिक युद्धपोतों तथा सैकड़ों सैन्य विमानों को तैनात किया गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने इसकी पुष्टि की है।
समुद्री मार्गों पर सख्त निगरानी
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी तटीय इलाकों और बंदरगाहों से गुजरने वाले जहाजों की कड़ी निगरानी की जा रही है। यह कदम होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की आशंका के बीच उठाया गया है।
अमेरिका-ईरान के बीच हमले तेज
सेंटकॉम के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ लगातार हमलों का एक और दौर शुरू किया है। हालिया अभियान में बुशहर, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास जैसे रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया।
इन हमलों में ईरान के तटीय रक्षा सिस्टम, मिसाइल लॉन्चिंग साइट्स, ड्रोन बेस और नौसैनिक क्षमताओं को नुकसान पहुंचाने का दावा किया गया है।
ईरान का पलटवार
ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले करने का दावा किया है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने की खबरें भी सामने आई हैं।
कुवैत ने दावा किया है कि उसने कई ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।
तेल बाजार में उथल-पुथल
इस संघर्ष का असर वैश्विक बाजार पर भी पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है।
टोल नीति पर यू-टर्न
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 20% टोल लगाने के प्रस्ताव को वापस ले लिया है। इसके बजाय अब खाड़ी देशों के साथ व्यापार और निवेश समझौतों पर जोर दिया जा रहा है।

प्रतिबंधों का दायरा बढ़ा
अमेरिका ने ईरान से जुड़े शिपिंग कारोबारी मोहम्मद हुसैन शामखानी और उससे संबंधित कई कंपनियों व जहाजों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का आरोप है कि यह नेटवर्क ईरान और रूस के तेल परिवहन से जुड़ा है।
धमाकों और हमलों की खबरें
ईरान के बंदर अब्बास और सिरिक क्षेत्रों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गई हैं। वहीं, ईरानी मीडिया ने इलाम प्रांत के देहलोरान शहर में अमेरिकी हमले का दावा किया है।
बढ़ता खतरा
सेंटकॉम के अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य टकराव से व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका गहरा गई है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह टकराव न केवल मध्य पूर्व, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।





