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आस्था की चढ़ाई: कोटेश्वर शिवमंदिर की सीढ़ियां मिटाती हैं मन का तनाव

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बेतवा नदी किनारे स्थित एतिहासिक मंदिर में विराजमान है पाताली शिवलिंगहमीरपुर, 06 फरवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में बेतवा नदी किनारे कोटेश्वर शिवमंदिर में महाशिवरात्रि को लेकर तैयारियां शुरू हो गई है। मंदिर को चमकाने के लिए कारीगरों ने डेरा डाल दिया है। यह मंदिर सैकड़ों साल पुराना है जहां पताली शिव लिंग स्थापित है। ऐसी मान्यता है कि मंदिर की सीढिय़ां चढ़ते ही लोग टेंशन से न सिर्फ मुक्त हो जाते है बल्कि मन्नतें पूरी होती है। इसीलिए आसपास के जिलों से हर साल महाशिवरात्रि के दिन यहां लोग माथा टेकने आते है।

हमीरपुर जिले के कुरारा क्षेत्र के बेरी गांव किमी जमाने में स्टेट रहा है। ये गांव बेतवा नदी किनारे बसा है। नदी के तट पर एक विशाल कोटेश्वर शिवमंदिर स्थित है। जो कोटेश्वर पावन धाम के नाम से प्रसिद्ध है। मंदिर के मंहत देवीदयाल ने बताया कि मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। बताया कि सैकड़ों साल पहले पाताल से एक प्राचीन शिव लिंग प्रगट हुआ था जिसे मंदिर में स्थापित कराया गया था। यह मंदिर कोटेश्वर धाम के नाम से समूचे बुन्देलखंड क्षेत्र में प्रसिद्ध है। महंत ने बताया कि हर साल महाशिवरात्रि के दिन बड़ी तादाद में लोग कोटेश्वर शिवमंदिर आते है। पाताली शिव लिंग की पूजा कर लोग मन्नतें मांगते है। मन्नत पूरी होने पर दोबारा महाशिवरात्रि के दिन शिव बारात में लोग शामिल होते है। बताया कि यह मंदिर बड़ा दिव्य है जहां मंदिर की सीढिय़ां चढ़ते ही लोग टेंशन मुक्त हो जाते है। बीमार लोग भी बड़े ही आराम से मंदिर की तमाम सीढिय़ां चढ़कर शिव लिंग तक माथा टेकने पहुंच जाते है।

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रियासत की महारानी ने बनवाया था कोटेश्वर धाम मंदिरमंदिर के पुजारी ने बताया कि वर्ष 1944 में बेरी रियासत की महारानी राजेन्द्र कुमारी जूदेव को सपने में इस मंदिर को भव्य रूप देने के लिए कहा गया तो महारानी गांव में बेतवा नदी के तट पर कोटेश्वर धाम मंदिर का निर्माण करवाया था। यह मंदिर बड़ा ही विशेष है जहां हर साल महाशिवरात्रि पर्व के दिन हजारों की तादाद में लोग मन्नतें लेकर यहां आते है। सच्चे मन से शिव लिंग का जलाभिषेक कर शिव पार्वती की शादी में शामिल होने पर मन की अभिलाषा भी जरूर पूरी होती है।

महाशिड्ढरात्रि पर्व पर शंकर और पार्वती की होती है शादीमहाशिवरात्रि को लेकर कोटेश्वर धाम सेवा समिति ने बड़े स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी है। पूरे मंदिर को रंग रोशन करने के लिये कारीगर डेरा डाले है। समिति के सदस्य कुलदीप सिंह, पंकज सिंह ने बताया कि महाशिवरात्रि को रामलीला के साथ मेला लगेगा। शिव की बारात की शोभायात्रा पूरे गांव में निकलेगी। रात में रामलीला के दौरान ही शिव पार्वती का विवाह सम्पन्न होगा। इसे देखने के लिए आसपास और पड़ोसी राज्य से हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ेगी।

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