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मंदिर से मस्जिद, सरना स्थल से गिरिजाघर तक गूंज रही है सिर्फ एक ही पुकार — गुरुजी जल्दी ठीक हों

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झारखंड की आत्मा, आदिवासी आंदोलन के जननायक, अलग राज्य की लड़ाई के सेनापति और करोड़ों दिलों की धड़कन दिशोम गुरु शिबू सोरेन इन दिनों दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती हैं। उनके स्वास्थ्य को लेकर न सिर्फ राजनीति जगत में चिंता है, बल्कि पूरे झारखंड में एक भावनात्मक लहर दौड़ पड़ी है।

झारखंड में ऐसा दृश्य शायद ही कभी देखा गया हो — जहाँ हर धर्म, हर जाति, हर वर्ग के लोग अपनी-अपनी परंपरा और श्रद्धा के अनुसार सिर्फ एक ही व्यक्ति की सलामती के लिए दुआ माँग रहे हैं।

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कटहल मोड़ शिव मंदिर बना श्रद्धा का केंद्र

राजधानी रांची के कटहल मोड़ स्थित प्राचीन शिव मंदिर में मंगलवार को विशेष हवन, और सामूहिक प्रार्थना का आयोजन हुआ। इस भावनात्मक क्षण की अगुवाई झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता विनोद तिर्की ने की।हवन कुंड की अग्नि में जब आहुतियाँ दी जा रही थीं, हर मंत्र के साथ लोगों की आंखें नम थीं और जुबान पर सिर्फ एक ही नाम था शिबू सोरेन।इस विशेष आयोजन में झामुमो नेता अंतू तिर्की, शुक्रमणि देवी, राखी देवी समेत बड़ी संख्या में झामुमो के नेता उपस्थित रहे।

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भावनाएं शब्दों में छलकीं:

झामुमो के वरिष्ठ नेता विनोद तिर्की ने कहा:झारखंड की माटी में जब भी कोई संघर्ष खड़ा हुआ, दिशोम गुरु सबसे आगे रहे। आज जब वो अस्पताल में हैं, तब हम सबको उनके लिए आत्मा से प्रार्थना करनी चाहिए। हमारी आस्था उन्हें ज़रूर वापस लाएगी।अंतू तिर्की बोले गुरुजी हमारे राजनीतिक पथ प्रदर्शक नहीं, वो हमारी चेतना हैं। करोड़ों लोग उनके लिए दुआ कर रहे हैं। ईश्वर उन्हें जल्द स्वस्थ करे — यही हर झारखंडवासी की पुकार है।

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झारखंड के कोने-कोने से उठी प्रार्थना की लहर

मंदिरों में घंटियों की गूंज के साथ मंत्रोच्चार,मस्जिदों में विशेष नमाज़ और दुआ,गिरिजाघरों में मोमबत्तियों के साथ सामूहिक प्रार्थना सरना स्थलों पर जल अर्पण और हूल जोहार हर ओर बस एक ही नाम दिशोम गुरु।यह कोई साधारण श्रद्धा नहीं, यह उस महानायक के प्रति अपार प्रेम और विश्वास है, जिन्होंने जल-जंगल-जमीन की लड़ाई को संसद तक पहुँचाया, जिन्होंने झारखंड को अलग राज्य के रूप में जन्म दिया और जिनका जीवन खुद एक महाकाव्य है।

नेता नहीं, युगपुरुष हैं शिबू सोरेन

शिबू सोरेन सिर्फ झामुमो के नहीं, वो हर उस व्यक्ति की उम्मीद हैं जो हाशिए पर है, जो अपने अधिकार के लिए लड़ता है। उनकी बीमारी पर राज्यभर की चिंता इस बात का सबूत है कि उन्होंने दिलों में राज किया है, सिर्फ सत्ता में नहीं।

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