गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे परियोजना को गति: किशनगंज के ठाकुरगंज, बहादुरगंज और टेढ़ागाछ में शुरू हुआ भूमि अधिग्रहण

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किशनगंज, 04 अगस्त । जिले में बहुप्रतीक्षित गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से भू-अर्जन विभाग को अधियाचना सौंपे जाने के बाद जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को सीमांचल क्षेत्र के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तीन प्रखंडों के 51 मौजा की जमीन होगी अधिग्रहित

प्रस्तावित एक्सप्रेसवे किशनगंज जिले के ठाकुरगंज, बहादुरगंज और टेढ़ागाछ प्रखंडों से होकर गुजरेगा। परियोजना के लिए जिले के कुल 51 मौजा की भूमि अधिग्रहित की जाएगी।

इनमें शामिल हैं:

  • ठाकुरगंज प्रखंड: 22 मौजा
  • बहादुरगंज प्रखंड: 23 मौजा
  • टेढ़ागाछ प्रखंड: 6 मौजा

भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है।

32 हजार करोड़ की लागत से बनेगा एक्सप्रेसवे

करीब 519 किलोमीटर लंबे गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे का निर्माण लगभग 32 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से किया जाएगा। केंद्र सरकार ने इस परियोजना को वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से शुरू होकर बिहार के पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज होते हुए पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक पहुंचेगा।

सीमांचल में बढ़ेगी आर्थिक गतिविधि

परियोजना के पूरा होने से सीमांचल क्षेत्र में व्यापार, उद्योग, कृषि विपणन और पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क संपर्क के कारण नेपाल, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों के साथ कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, एक्सप्रेसवे बनने से माल परिवहन आसान होगा और क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण

गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे को सामरिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। यह उत्तर भारत को पूर्वोत्तर भारत से जोड़ने वाले प्रमुख सड़क मार्गों में शामिल होगा।

15 घंटे की यात्रा घटकर 6-8 घंटे होने की उम्मीद

वर्तमान में गोरखपुर से सिलीगुड़ी की यात्रा में करीब 14 से 15 घंटे का समय लगता है। एक्सप्रेसवे बनने के बाद यह दूरी लगभग 6 से 8 घंटे में पूरी होने की संभावना है।

परियोजना से यात्रा समय में कमी के साथ-साथ निर्माण कार्य और बाद के चरणों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।

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