बांकीपुर जीत के बाद प्रशांत किशोर का बड़ा बयान, बोले—सरकारों को अब शिक्षा, रोजगार और विकास पर ध्यान देना होगा

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पटना, 03 अगस्त: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने केंद्र और बिहार सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जनता ने इस चुनाव के जरिए साफ संदेश दिया है कि अब राजनीति केवल जाति, नारे और सत्ता तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि शिक्षा, रोजगार और विकास जैसे बुनियादी मुद्दों पर गंभीरता से काम करना होगा।

जनता के फैसले में बदलाव का संकेत
मीडिया से बातचीत में प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम सिर्फ एक सीट की जीत नहीं, बल्कि जनता की सोच में आए बदलाव का संकेत है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “30 वर्ष का गढ़ 30 दिनों में ढह गया। केंद्र हो या राज्य सरकार, पढ़ाई और रोजगार पर काम करे, नहीं तो आगे भी यही हाल होगा।”

प्रशासनिक व्यवस्था पर उठाए सवाल
उन्होंने बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि अपराधी प्रवृत्ति के व्यक्ति के हाथों में राज्य की कमान देकर विकास की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि अब जनता सीधे प्रधानमंत्री से अपेक्षा कर रही है कि बिहार को ईमानदार, योग्य और दूरदर्शी मुख्यमंत्री मिले।

जनता के विश्वास को बताया जिम्मेदारी
प्रशांत किशोर ने बांकीपुर की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें मिला समर्थन उनके लिए जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में उनकी प्राथमिकता शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और विकास से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने की होगी।

नेतृत्व चयन पर दी नसीहत
भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि नेतृत्व किसी भी समाज के व्यक्ति को दिया जा सकता है, लेकिन वह ईमानदार, चरित्रवान और सक्षम होना चाहिए। केवल सामाजिक समीकरणों के आधार पर नेतृत्व तय करना अब उचित नहीं है।

क्षेत्रीय असमानता पर केंद्र को घेरा
उन्होंने केंद्र सरकार की विकास नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि गुजरात में बुलेट ट्रेन जैसी परियोजनाएं चल रही हैं तो यह अच्छी बात है, लेकिन बिहार के लोगों को कम से कम बेहतर रेल सुविधाएं और समय पर चलने वाली पैसेंजर ट्रेन मिलनी चाहिए। विकास का लाभ सभी राज्यों तक समान रूप से पहुंचना जरूरी है।

नई राजनीति और व्यवस्था परिवर्तन की बात
प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर का चुनाव सिर्फ स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं था, बल्कि यह बिहार के भविष्य और नई राजनीति की वैचारिक लड़ाई थी। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले दो महीनों में इस बदलाव का असर विकास कार्यों और राजनीतिक माहौल में दिखाई देगा।

किसी व्यक्ति नहीं, व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि उद्देश्य बिहार को बेहतर नेतृत्व देना है। उन्होंने कहा कि जनता ने भाजपा को जनादेश दिया है और अब उसकी जिम्मेदारी है कि राज्य को सक्षम नेतृत्व मिले।

नई राजनीति का संदेश
प्रशांत किशोर ने दोहराया कि बांकीपुर उपचुनाव का जनादेश केवल राजनीतिक जीत नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, सुशासन और विकास को केंद्र में रखकर नई राजनीति की शुरुआत का संकेत है।

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