पश्चिम बंगाल में एसीबी को मिली नई ताकत, खुफिया विभाग से तीन आईपीएस अधिकारियों की तैनाती

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कोलकाता, 03 अगस्त: पश्चिम बंगाल सरकार ने भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच को और प्रभावी बनाने के लिए राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) को मजबूत किया है। सरकार ने खुफिया विभाग (इंटेलिजेंस ब्रांच) में तैनात तीन आईपीएस अधिकारियों का तबादला एसीबी में कर दिया है।

तीन आईपीएस अधिकारियों की एसीबी में तैनाती
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, आईपीएस अधिकारी मुरलीधर शर्मा, आकाश मघरिया और कामनासिस सेन को इंटेलिजेंस ब्रांच से एसीबी में भेजा गया है। इन अधिकारियों की तैनाती से भ्रष्टाचार के मामलों की जांच में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

16 अन्य पुलिसकर्मी भी प्रतिनियुक्त
तीन आईपीएस अधिकारियों के अलावा राज्य पुलिस के 16 अन्य अधिकारियों और कर्मियों को भी दो महीने के लिए अस्थायी रूप से एसीबी में प्रतिनियुक्त किया गया है। सभी अधिकारियों को 4 अगस्त की सुबह 10 बजे तक नई तैनाती स्थल पर योगदान देने का निर्देश दिया गया है।

कई पुलिस इकाइयों से आए अधिकारी
प्रतिनियुक्त किए गए अधिकारियों में एक डीएसपी, कई इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर और कांस्टेबल शामिल हैं। ये अधिकारी बैरकपुर पुलिस कमिश्नरेट, सीआईडी, एसटीएफ, इंटेलिजेंस ब्रांच, हावड़ा जीआरपी, पश्चिम मेदिनीपुर, हुगली ग्रामीण, कृष्णनगर और सुंदरबन पुलिस जिला समेत विभिन्न इकाइयों में तैनात थे।

जांच क्षमता बढ़ाने की तैयारी
प्रतिनियुक्त अधिकारियों की सूची में डीएसपी विश्वजीत पात्र, इंस्पेक्टर दीपंकर सरकार, सौमेन विश्वास, संजय कुमार मंडल, प्रणवकांति साहू, अनुप घोष, रामगोपाल पाल, संजय कुमार डे, देबांजन भट्टाचार्य, सब-इंस्पेक्टर बच्चू मुरारी, जहांगीर अली, बप्पा सरकार समेत अन्य पुलिसकर्मियों के नाम शामिल हैं।

भ्रष्टाचार के मामलों में तेजी लाने का उद्देश्य
पुलिस और प्रशासनिक हलकों का मानना है कि अलग-अलग इकाइयों से अनुभवी अधिकारियों को एसीबी में शामिल करने का उद्देश्य भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच को तेज करना, लंबित मामलों का जल्द निपटारा करना और एंटी करप्शन ब्रांच की जांच क्षमता को और मजबूत बनाना है।

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