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नवादा मंडल कारा में कैदी मनोज साव की संदिग्ध मौत, परिवार ने जेल प्रशासन पर लगाया आरोप

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नवादा। नवादा मंडल कारा से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां न्यायिक हिरासत में बंद कैदी मनोज साव उर्फ टुनटुन साव की बुधवार को मौत हो गई।

घटना के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतक के परिजन ने जेल प्रशासन पर लापरवाही और प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, मनोज साव को 21 दिसंबर 2025 को हिसुआ थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया था। अगले दिन यानी 22 दिसंबर 2025 को उन्हें न्यायिक हिरासत में नवादा मंडल कारा भेजा गया। बताया जा रहा है कि मनोज साव पूरी तरह स्वस्थ थे और उन्हें किसी प्रकार की गंभीर बीमारी नहीं थी। पत्नी संजू देवी ने जेल प्रशासन पर हत्या का आरोप लगाते हुए प्राथमिक की दर्ज करने की मांग की है।

पत्नी संजू देवी के अनुसार, 28 दिसंबर 2025 को मृतक के पुत्र ने जेल में अपने पिता से मुलाकात की थी। उस समय मनोज साव की तबीयत सामान्य थी और उन्होंने किसी तरह की शारीरिक या मानसिक परेशानी की शिकायत नहीं की थी। इसके बावजूद 7 जनवरी 2026 को जेल प्रशासन की ओर से अचानक परिवार को मनोज साव की मौत की सूचना दी गई, जिससे परिजन स्तब्ध रह गए।

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परिवार का आरोप है कि जेल प्रशासन ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि मनोज साव की मौत किन परिस्थितियों में हुई। न तो बीमारी की कोई ठोस जानकारी दी गई और न ही इलाज से संबंधित कोई दस्तावेज साझा किए गए। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर समुचित इलाज या देखरेख की गई होती, तो मनोज साव की जान बचाई जा सकती थी।

घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए। उनका कहना है कि यह कोई सामान्य मौत नहीं बल्कि संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत है, जिसकी गहराई से जांच होनी चाहिए। परिजनों ने आशंका जताई है कि मनोज साव को जेल के अंदर प्रताड़ित किया गया या उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय सुविधा नहीं दी गई।

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इस पूरे मामले में अब तक जेल प्रशासन या जिला प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत और स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मौत के वास्तविक कारण—चाहे वह बीमारी हो, इलाज में लापरवाही हो या कोई अन्य कारण—अब भी संदिग्ध बनी हुई हैं।

कानून और मानवाधिकार के जानकारों का कहना है कि न्यायिक हिरासत में बंद किसी भी व्यक्ति की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी राज्य और जेल प्रशासन की होती है। ऐसे में जेल के अंदर किसी कैदी की मौत होना गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच अनिवार्य है।

फिलहाल, मनोज साव की मौत ने नवादा मंडल कारा की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजन और स्थानीय लोग दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और न्याय की मांग कर रहे हैं। अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले में कितनी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करता है। जेल अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी भी दर्ज करने की मांग की गई है।

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