बिहार में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार ने जीविका दीदियों को बड़ा तोहफा दिया है। इस योजना के तहत राज्य के 50 हजार जीविका समूहों को 10-10 लाख रुपये तक का लोन उपलब्ध कराया जाएगा।
यह पहल वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान लागू की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि इन समूहों की महिलाओं को स्वरोजगार के लिए मजबूत आर्थिक आधार मिले और वे अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकें। राज्य में पहले से ही करीब 11 लाख जीविका समूह सक्रिय हैं, जिनसे बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हुई हैं।
जानकारी के अनुसार, जिन समूहों का पूर्व में लोन चुकाने का रिकॉर्ड अच्छा रहा है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर यह सुविधा दी जाएगी। एक समूह में औसतन 10 से 12 महिलाएं होती हैं, ऐसे में प्रत्येक सदस्य को लगभग एक लाख रुपये तक का लाभ मिल सकता है।
सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में जीविका समूहों को कुल 16 हजार करोड़ रुपये तक का लोन देने का लक्ष्य रखा है, जबकि पिछले वर्ष करीब 14 हजार करोड़ रुपये का लोन वितरित किया गया था।
जीविका योजना के तहत महिलाएं छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसाय जैसे किराना दुकान, पशुपालन, कृषि, मछली पालन, चाय दुकान या ब्यूटी पार्लर आदि शुरू करती हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
खास बात यह है कि जीविका समूहों का लोन रिकवरी रेट करीब 99 प्रतिशत है, जिससे बैंकों का भरोसा भी मजबूत बना हुआ है।
सरकार का उद्देश्य आने वाले वर्षों में अधिक से अधिक समूहों को 10 लाख तक के लोन के योग्य बनाना है, ताकि महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।





