एमएमडीआर संशोधन के विरोध पर बाबूलाल मरांडी का हमला, बोले- झामुमो-कांग्रेस का रवैया केवल राजनीतिक नाटक, छात्रों के मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश

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रांची, 17 अगस्त । संसद से पारित एमएमडीआर संशोधन विधेयक का समर्थन करते हुए झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, झामुमो और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विधेयक को लेकर राज्य सरकार जनता को भ्रमित कर रही है और इसका इस्तेमाल छात्रों के आंदोलन से जुड़े मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है।

भाजपा प्रदेश कार्यालय में सोमवार को आयोजित प्रेसवार्ता में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि एमएमडीआर संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य राज्यों का खनन राजस्व छीनना नहीं है। उनके अनुसार रॉयल्टी, डीएमएफ, एनएमईटी, नीलामी प्रीमियम और जीएसटी में राज्यों की हिस्सेदारी बनी रहेगी तथा खनन क्षेत्र से होने वाले भुगतानों का करीब 90 प्रतिशत राज्यों को मिलता रहेगा।

उन्होंने दावा किया कि 2014-15 से 2024-25 के बीच राज्यों का खनिज राजस्व करीब 354 प्रतिशत बढ़कर 25,206 करोड़ रुपये से 1,14,549 करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि में कुल खनिज राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से बढ़कर 88 प्रतिशत से अधिक हुई।

खनिज नीति को लेकर राज्य सरकार पर सवाल

मरांडी ने कहा कि झारखंड की समस्या केंद्र सरकार नहीं, बल्कि राज्य की अपनी खनिज नीति है। उन्होंने लौह अयस्क पर 600 रुपये प्रति टन फ्लैट उपकर और कोयले पर उपकर बढ़ाए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे उत्पादन और बाजार प्रभावित हुआ है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले छह वर्षों में झारखंड ने केवल चार खदानों की नीलामी की और इनमें से एक भी अभी संचालन में नहीं आ सकी। इसके विपरीत ओडिशा में 35 खदानें चालू हुईं और करीब 87 हजार करोड़ रुपये का नीलामी प्रीमियम प्राप्त हुआ।

मरांडी ने कहा कि लघु खनिज, बालू और पत्थर पर एमएमडीआर संशोधन का प्रभाव नहीं पड़ेगा और इन पर राज्यों का नियंत्रण पहले की तरह बना रहेगा।

उन्होंने डीएमएफ के उपयोग को लेकर भी राज्य सरकार से सवाल किया। उनके अनुसार झारखंड में डीएमएफ के तहत करीब 19 हजार करोड़ रुपये जमा हैं, जबकि पश्चिमी सिंहभूम में ही करीब 3,700 करोड़ रुपये जमा हैं। उन्होंने पूछा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों और ग्रामीणों के विकास में इस राशि का प्रभावी इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया।

छात्रों के आंदोलन से मुद्दा भटकाने का आरोप

बाबूलाल मरांडी ने झामुमो-कांग्रेस पर छात्रों के आंदोलन से ध्यान हटाने के लिए एमएमडीआर संशोधन का मुद्दा उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि छात्र जेपीएससी, जेएसएससी और सीजीएल परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि छात्र कई दिनों से आमरण अनशन पर हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों का समाधान करने के बजाय दूसरे मुद्दों के जरिए जनता का ध्यान भटका रही है।

मरांडी ने कहा कि जैसे ही छात्रों ने मुख्यमंत्री आवास के घेराव की घोषणा की, सरकार ने वार्ता का निमंत्रण भेज दिया। उनके मुताबिक, यह सरकार की संवेदनशीलता नहीं बल्कि दबाव में काम करने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।

ख्यांग्ते को लेकर भी जांच की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते को लेकर सामने आई कथित मीडिया रिपोर्टों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ख्यांग्ते के जेपीएससी अध्यक्ष बनने के लिए कथित तौर पर 70 करोड़ रुपये दिए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने सरकार से इस आरोप पर स्थिति स्पष्ट करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

मरांडी ने कहा कि झामुमो, कांग्रेस और राजद को एमएमडीआर संशोधन विधेयक को लेकर जनता को गुमराह करने के बजाय छात्रों की मांगों का समाधान करना चाहिए। उनके अनुसार भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच ही मौजूदा समय में सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

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