मानव तस्करी के मामलों के आंकड़ों में भारी गड़बड़ी पकड़ाई; महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों का संशोधित डेटा मांगा गया
Ranchi: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय स्क्रूटनी के दौरान झारखंड पुलिस द्वारा भेजे गए मानव तस्करी संबंधी आंकड़ों में गंभीर त्रुटियां और लापरवाही सामने आने के बाद राज्य CID ने सभी जिलों के SSP और SP (रेलवे सहित) को नोटिस जारी किया है। CID ने निर्देश दिया है कि वर्ष 2022 से 2025 तक के सभी मामलों का संशोधित और विस्तृत डेटा नए एक्सेल फॉर्मेट में तत्काल उपलब्ध कराया जाए, ताकि सही जानकारी NHRC को भेजी जा सके।
NHRC की जांच में बच्चों और महिलाओं की तस्करी से जुड़े मामलों के रिकॉर्ड में कई महत्वपूर्ण जानकारियां गायब मिलीं। मानव तस्करों को सजा मिलने, आरोपियों के बरी होने और लंबित मुकदमों की स्थिति का डेटा कई मामलों में उपलब्ध नहीं था। कई एंट्री में रिमार्क कॉलम खाली छोड़ दिया गया था, जबकि गंभीर मामलों के सामने बिना किसी स्पष्टीकरण के “Nil”, “NA” या “Yes” दर्ज कर दिया गया था।
जांच के दौरान कई जिलों के रिकॉर्ड में तथ्यात्मक गलतियां भी सामने आईं। साहिबगंज के बोरियो थाना कांड संख्या 22/2022 में घटना अगस्त 2021 की होने के बावजूद FIR फरवरी 2022 में दर्ज की गई, लेकिन देरी का कोई कारण नहीं बताया गया। वहीं एक अन्य मामले में घटना की तारीख और रेस्क्यू की तारीख का क्रम ही उल्टा दर्ज कर दिया गया था।
नवजात बच्ची की तस्करी से जुड़े एक मामले में अधिकांश कॉलम खाली पाए गए। कई मामलों में वर्षों की देरी से FIR दर्ज होने और पीड़ितों का अब तक पता नहीं चल पाने जैसी गंभीर खामियां भी सामने आईं।
NHRC की महानिदेशक (अन्वेषण) के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद अब झारखंड पुलिस को संशोधित ‘एनेक्चर-बी’ फॉर्मेट में विस्तृत जानकारी देनी होगी। इसमें दर्ज FIR, रेस्क्यू ऑपरेशन, चिन्हित हॉटस्पॉट, गिरफ्तार आरोपी, चार्जशीट, सजा और बरी होने के मामलों का पूरा ब्यौरा शामिल होगा।
इसके अलावा पुलिस को यह भी बताना होगा कि पीड़ितों को काउंसलिंग, कानूनी सहायता, आर्थिक मदद, शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं मिलीं या नहीं। साथ ही जांच लंबित रहने अथवा आरोपियों के बरी होने के पीछे की प्रमुख वजहों का भी विस्तृत उल्लेख करना अनिवार्य किया गया है।






