Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

हाईटेक हथियारों के साथ प्रदर्शन: युद्धाभ्यास ‘खड़ग शक्ति’ में दिखी भारत की सैन्य शक्ति और युद्ध कौशल

Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

Share

बीकानेर। एशिया की सबसे बड़ी महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में ‘खड़ग शक्ति’ युद्धाभ्यास के दौरान भारतीय सेना की सैन्य शक्ति एक बार फिर देखने को मिली। सेना ने आधुनिक और पारंपरिक युद्ध कौशल का जबरदस्त प्रदर्शन किया। इस दौरान दस हजार फीट की ऊंचाई से पैराट्रूपरों की सामरिक छलांग, चेतक और चीता हेलीकॉप्टरों द्वारा त्वरित एम्युनिशन आपूर्ति व रेकी, हथियारों से लैस अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर की सटीक मार कार्रवाई, स्वॉर्म और लॉजिस्टिक ड्रोन का उपयोग के साथ-साथ तोपखाने की समन्वित फायरिंग का प्रदर्शन हुआ।

अभ्यास में ड्रोन ऑपरेशन्स, दिव्यास्त्र बैटरी, अग्निबाण रेजीमेंट, अश्नी योद्धा सिस्टम, स्मर्च रॉकेट सिस्टम और इंटीग्रेटेड आर्टिलरी फायरपावर का प्रदर्शन किया गया। अंतिम चरण में पश्चिमी कमान के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार खटियार और टू कोर कमांडर जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर की उपस्थिति में संयुक्त युद्धाभ्यास और एयरबोर्न ऑपरेशन का लाइव प्रदर्शन हुआ। 8 से 10 हजार फीट की ऊंचाई से पैराड्रॉप, सटीक आर्टिलरी स्ट्राइक और दुश्मन क्षेत्र में घुसकर कार्रवाई का सिमुलेशन इस अभ्यास की खास झलक रही। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने अभ्यास का निरीक्षण करते हुए विभिन्न चरणों की समीक्षा की।

- Sponsored -
Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर ने बताया कि युद्धाभ्यास के दौरान महाजन की रेतीली धरा पर सेना की तोपें और टैंको ने अपनी गर्जना से आसमान गुंजायमान कर दिया और ड्रोन तकनीक के उपयोग पर विशेष फोकस किया गया। युद्धाभ्यास में नाइट फायरिंग (रात्रि कालीन युद्धाभ्यास) पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसके माध्यम से अंधेरे में भी दुश्मन के काल्पनिक ठिकानों को अचूक निशानों से ध्वस्त करने का अभ्यास किया गया। आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए इस अभ्यास में ड्रोन तकनीक का व्यापक उपयोग किया गया, जिससे निगरानी से लेकर सटीक हमलों तक में ड्रोन की भूमिका प्रदर्शित की गई।

\

- Sponsored -
Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

अभ्यास की एक प्रमुख विशेषता ड्रोन आधारित निगरानी और आक्रमण प्रणाली रही। स्वॉर्म ड्रोन और क्वाटकॉप्टर के माध्यम से वास्तविक समय में लक्ष्य चिन्हांकन किया गया। चेतक हेलीकॉप्टरों ने गोला बारुद और आवश्यक सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित की, जिससे अग्रिम मोर्चे पर तैनात टुकडिय़ों की संचालन क्षमता निर्बाध बनी रही। जमीनी स्तर पर टेंक, बख्तरबंद वाहन और मशीनीकृत पैदल सेना ने एकीकृत फायरिंग ड्रिल के माध्यम से आगे बढ़ते हुए लक्ष्य भेदन का अभ्यास किया। कमांडो की अग्रिम टुकड़ी ने दुश्मन के ठिकानों की पहचान कर उनकी सूचना तोपखाना इकाईयों को दी, जिसके बाद समन्वित गोलाबारी से लक्ष्यों को निष्प्रभावी किया गया।

Your Brand Here
Limited time offer
Shop Now →

Share this article

Facebook
Twitter X
WhatsApp
Telegram
 
May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031