देवघर, 24 अगस्त । सावन की अंतिम सोमवारी पर देवघर स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे भक्त बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए।
सुबह 4:30 बजे खुले मंदिर के पट
बाबा बैद्यनाथ मंदिर के पट सोमवार सुबह 4:30 बजे खोले गए। इसके बाद श्रद्धालुओं ने बाबा के पवित्र शिवलिंग पर जलार्पण शुरू किया। अंतिम सोमवारी को देखते हुए मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से मंदिर में प्रवेश कराया जा रहा है, ताकि जलार्पण के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो।
पिछली सोमवारी से अधिक भीड़
देवघर के उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया ने बताया कि पिछली सोमवारी की तुलना में इस बार श्रद्धालुओं की संख्या अधिक है। प्रशासन की ओर से भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
एसपी प्रवीण पुष्कर ने बताया कि पुलिसकर्मी रात से ही श्रद्धालुओं को कतारबद्ध करने और व्यवस्थित तरीके से मंदिर में प्रवेश कराने में जुटे हैं।
डीजीपी ने किया सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण
झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा ने भी सोमवार को बाबा बैद्यनाथ के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर और आसपास की सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया। अधिकारियों को श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बेलपत्र और जल का विशेष महत्व
बाबा बैद्यनाथ मंदिर के सरदार पंडा गुलाब नंद झा ने सावन की सोमवारी को भगवान भोलेनाथ की आराधना के लिए विशेष महत्व वाला बताया। उन्होंने कहा कि बाबा भोलेनाथ के लिए बेलपत्र, जल और सच्ची आस्था का विशेष महत्व है। सावन की अंतिम सोमवारी पर बाबा के दर्शन और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का पहुंचना आस्था का प्रतीक है।
देर रात तक 3.5 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान
प्रशासन के अनुमान के मुताबिक अंतिम सोमवारी पर देर रात तक करीब 3.5 लाख श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ के दरबार में जलार्पण कर सकते हैं। भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर से लेकर श्रद्धालुओं के प्रवेश मार्ग तक सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त व्यवस्था की गई है।






