पटना। नीट पेपर लीक मामले को लेकर राजधानी पटना में हुए उग्र प्रदर्शन के बाद बिहार पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। राज्यभर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और सभी जिलों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए गए हैं।
राज्यभर में हाई अलर्ट
पुलिस मुख्यालय में देर शाम आयोजित समीक्षा बैठक के बाद सभी जिलों के एसपी को कानून-व्यवस्था पर कड़ी नजर रखने को कहा गया है।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि संवेदनशील इलाकों पर विशेष निगरानी रखें और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी सुनिश्चित करें।
प्रदर्शन के दौरान हिंसक झड़प
22 जुलाई को पटना के जेपी गोलंबर के पास आइसा के नेतृत्व में नीट पेपर लीक समेत अन्य मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा था।
जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की, तो छात्र आक्रोशित हो गए और राजभवन घेरने के लिए डाकबंगला चौराहे की ओर बढ़ने लगे।
इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई, जो जल्द ही झड़प में बदल गई।
लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल
स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसके बाद आंसू गैस के गोले छोड़े गए और वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया गया।
आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की और पथराव किया, जिससे इलाके में अफरातफरी मच गई।
कई पुलिसकर्मी घायल
पथराव और झड़प के दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए। गांधी मैदान थानाध्यक्ष अखिलेश कुमार मिश्र के सिर में चोट लगी, जबकि आईजी जितेंद्र राणा के पैर में बैरिकेड गिरने से चोट आई।
इसके अलावा कोतवाली थाना की तीन पुलिस गाड़ियों और आईजी की स्कॉर्ट वाहन को भी नुकसान पहुंचा।
40 छात्रों को हिरासत में लिया गया
घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए देर रात 40 छात्रों को हिरासत में लिया। इनमें 38 छात्र और दो छात्राएं शामिल हैं। सभी को कोतवाली थाना ले जाया गया।
हालांकि कुछ परिजनों का दावा है कि उनके बच्चे प्रदर्शन में शामिल नहीं थे और उन्हें गलत तरीके से हिरासत में लिया गया है।
स्थिति पर प्रशासन की नजर
पुलिस और प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है और किसी भी तरह की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नीट पेपर लीक को लेकर बिहार में बढ़ता आक्रोश अब कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बनता जा रहा है। सरकार और प्रशासन के सामने एक ओर परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर विरोध प्रदर्शनों को शांतिपूर्ण बनाए रखने की जिम्मेदारी भी।






