नैनीताल, 16 जुलाई। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत नैनीताल जिले के रामगढ़ विकासखंड के नथुआखान क्षेत्र में स्थापित एरोमैटिक प्लांट क्लस्टर ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बनकर उभरा है। इस पहल से आठ ग्राम पंचायतों की 300 से अधिक महिलाएं जुड़कर औषधीय एवं सुगंधित पौधों की वैज्ञानिक खेती कर रही हैं और उच्च गुणवत्ता वाली हर्बल चाय का उत्पादन कर अपनी आय बढ़ा रही हैं।
औषधीय पौधों से तैयार हो रही हर्बल चाय
महिला स्वयं सहायता समूह कैमोमाइल, तुलसी, पुदीना, थाइम, रोजमेरी, बुरांश और लेमनग्रास जैसी औषधीय जड़ी-बूटियों से स्वास्थ्यवर्धक हर्बल चाय तैयार कर रहे हैं। प्राकृतिक गुणों से भरपूर यह उत्पाद स्वाद, गुणवत्ता और स्वास्थ्य लाभ के कारण स्थानीय बाजार के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना रहा है।
ब्रांडिंग और पैकेजिंग से बढ़ी मांग
राज्य सरकार के सहयोग से उत्पादों की आधुनिक ब्रांडिंग और आकर्षक पैकेजिंग पर विशेष ध्यान दिया गया है। वर्तमान में हर्बल चाय 250 और 500 ग्राम के पैक में 150 से 300 रुपये की कीमत पर उपलब्ध है, जबकि इसकी औसत कीमत लगभग 600 रुपये प्रति किलोग्राम है। बेहतर पैकेजिंग और प्रभावी विपणन के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे महिला स्वयं सहायता समूहों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
प्रशिक्षण से महिलाएं बनीं सफल उद्यमी
राज्य सरकार द्वारा प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और विपणन सहयोग उपलब्ध कराए जाने से महिलाओं को स्वरोजगार के नए अवसर मिले हैं। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि अब वे केवल खेती तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती
यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग का सफल उदाहरण बनकर सामने आई है। रामगढ़ की हर्बल चाय यह साबित कर रही है कि स्थानीय उत्पादों को आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण पैकेजिंग और बेहतर विपणन का सहयोग मिले तो वे वैश्विक बाजार में भी अपनी मजबूत पहचान बना सकते हैं।






