रांची। उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल और प्रदेश प्रवक्ता अमित मंडल ने मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।
प्रेसवार्ता में सरकार पर निशाना
भाजपा नेताओं ने गुरुवार को पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित संयुक्त प्रेसवार्ता में कहा कि 12 अप्रैल को हुई उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में पेपर लीक की घटना पहली बार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि झामुमो, कांग्रेस और राजद की सरकार में आयोजित अधिकांश परीक्षाएं विवादों में रही हैं।
नवीन जायसवाल ने कहा कि अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र से घर पहुंचने से पहले ही सोशल मीडिया पर पेपर लीक की चर्चा शुरू हो जाती है, जो पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।
“जांच में हड़बड़ी, कुछ बड़ा छिपाने की कोशिश”
जायसवाल ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच में हड़बड़ी साफ संकेत देती है कि मामले में बड़ा घालमेल है। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं के भविष्य के साथ बार-बार खिलवाड़ किया जा रहा है और सरकार इस मामले में पारदर्शिता नहीं दिखा रही है।
उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री निष्पक्ष हैं तो उन्हें इस मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जांच की अनुशंसा करनी चाहिए, जिससे सच्चाई सामने आ सके।
तमाड़ में गिरफ्तारी पर भी उठाए सवाल
भाजपा नेता ने बताया कि परीक्षा से एक दिन पहले तमाड़ में 179 अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया गया, जिनके साथ कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय गिरोह का सरगना अतुल वत्स भी पकड़ा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने इस पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया।
उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय थाना प्रभारी के बयान और प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया में विरोधाभास है। सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि सुनसान इलाके में इतनी संख्या में अभ्यर्थी किस तैयारी के लिए जुटे थे और यदि कोचिंग चल रही थी तो उन्हें जेल क्यों भेजा गया।
भर्ती एजेंसी पर भी सवाल
भाजपा नेताओं ने परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह एजेंसी पहले से ही विवादित है और बिहार में ब्लैकलिस्टेड भी रह चुकी है। सरकार से इस एजेंसी के चयन को लेकर जवाब मांगा गया।
तीन वर्षों की सभी परीक्षाओं की जांच की मांग
प्रदेश प्रवक्ता अमित मंडल ने कहा कि भाजपा सिर्फ इस मामले ही नहीं, बल्कि पिछले तीन वर्षों में हुई सभी विवादित परीक्षाओं की भी सीबीआई जांच की मांग करती है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच से ही “दूध का दूध और पानी का पानी” हो सकेगा।






