कर्नाटक के मांड्या से पीएम मोदी का संबोधन, कहा- भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराएं हमारी सबसे बड़ी ताकत

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मांड्या (कर्नाटक)। नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत हजारों वर्षों से चलती आ रही एक जीवंत सभ्यता है, जहां सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं की निरंतरता दुनिया में अद्वितीय है। बहुत कम देशों में इतनी लंबी अवधि तक परंपराएं जीवित रहती हैं।

प्रधानमंत्री कर्नाटक के मांड्या जिले में स्थित आदिचुंचनगिरि महासंस्थान मठ में श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने ‘सौंदर्य लहरी और शिव महिम्न स्तोत्रम’ नामक पुस्तक का विमोचन भी किया।

संतों की परंपरा ने समाज को दी दिशा

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय समाज में समय-समय पर ऐसे महान संत और महापुरुष जन्म लेते रहे हैं, जिन्होंने आध्यात्मिक मार्गदर्शन के साथ-साथ समाज के बीच रहकर लोगों के दुख-दर्द को समझा और उन्हें समाधान का रास्ता दिखाया।

प्रधानमंत्री के नौ प्रमुख आग्रह

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर देशवासियों से नौ प्रमुख आग्रह भी किए। उन्होंने जल संरक्षण को अपनाने, पानी के बेहतर प्रबंधन और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत वृक्षारोपण करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि स्वच्छता को केवल सरकारी कार्यक्रम न मानकर जन आंदोलन बनाना चाहिए। धार्मिक स्थलों, गांवों और शहरों में स्वच्छता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

‘वोकल फॉर लोकल’ और घरेलू पर्यटन पर जोर

प्रधानमंत्री ने ‘वोकल फॉर लोकल’ को अपनाने और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की। साथ ही उन्होंने देशवासियों से भारत के विभिन्न हिस्सों की यात्रा कर देश की विविधता को समझने का आग्रह किया।

स्वास्थ्य और प्राकृतिक खेती पर भी बल

उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने की अपील की। स्वास्थ्य के विषय में उन्होंने कहा कि मोटापा देश के सामने बड़ी चुनौती बनता जा रहा है, इसलिए लोगों को भोजन में तेल की मात्रा कम करनी चाहिए और मिलेट्स (श्री अन्न) को अपनाना चाहिए। योग और खेल को जीवन का हिस्सा बनाने पर भी उन्होंने बल दिया।

सेवा भाव से समाज होता है मजबूत

प्रधानमंत्री ने कहा कि जरूरतमंदों की सेवा समाज को मजबूत बनाती है और जीवन को उद्देश्य देती है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन आग्रहों पर अमल कर विकसित कर्नाटक और विकसित भारत का लक्ष्य तेजी से हासिल किया जा सकता है।

मठ की 2000 साल पुरानी परंपरा की सराहना

प्रधानमंत्री ने आदिचुंचनगिरि मठ की लगभग 2000 वर्ष पुरानी परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि इसकी गुरु परंपरा, आध्यात्मिक दर्शन और सेवा भाव ने पीढ़ियों तक समाज को दिशा दी है। उन्होंने दिवंगत संत डॉ. बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी के शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए योगदान को भी याद किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर केवल एक धार्मिक संरचना नहीं है, बल्कि सेवा, साधना और प्रेरणा का केंद्र बनेगा। यहां आध्यात्मिकता और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम देखने को मिलता है।

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