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राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस पर रांची में राज्यस्तरीय कार्यक्रम आयोजित, मातृ मृत्यु दर शून्य के करीब लाने का संकल्प

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– मातृ मृत्यु दर को शून्य के करीब लाना हमारा संकल्प : डॉ. इरफान अंसारी

रांची, 11 अप्रैल। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस के अवसर पर रांची में शनिवार को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने की।

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मातृ मृत्यु दर घटाना सरकार की प्राथमिकता

डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि किसी भी मां की मौत स्वीकार्य नहीं है और मातृ मृत्यु दर (MMR) को शून्य के करीब लाना सरकार का संकल्प है। उन्होंने बताया कि झारखंड को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में तीसरे स्थान से पहले स्थान पर लाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए व्यापक स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।

मेगा स्क्रीनिंग और डिजिटल हेल्थ पर जोर

स्वास्थ्य मंत्री ने जानकारी दी कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के लिए राज्यभर में थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया और कुपोषण की रोकथाम हेतु मेगा स्क्रीनिंग अभियान चलाया जाएगा।
इसके साथ ही डिजिटल हेल्थ सिस्टम को मजबूत करने के लिए 42,000 सहिया कार्यकर्ताओं को एक माह के भीतर टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे गांव-गांव तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित हो सके।

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किशोरियों की शिक्षा और एनीमिया नियंत्रण पर फोकस

उन्होंने किशोरियों की शिक्षा, एनीमिया नियंत्रण और बाल विवाह रोकने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने के लिए इन पहलुओं पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।

ममता वाहन और सहिया कार्यकर्ताओं की सराहना

डॉ. अंसारी ने ममता वाहन सेवा और सहिया कार्यकर्ताओं की भूमिका की सराहना करते हुए संस्थागत प्रसव को बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

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मातृ-शिशु स्वास्थ्य से तय होता है विकास

कार्यक्रम में अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि किसी भी राज्य के विकास का आकलन मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) जैसे सूचकों से किया जाता है।
वहीं, यूनिसेफ की प्रतिनिधि पारुल शर्मा ने झारखंड को मातृ-शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में उभरता मॉडल बताया।

तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने उच्च जोखिम गर्भावस्था (HRP) की समय पर पहचान और प्रबंधन पर जोर दिया। सभी वक्ताओं ने सुरक्षित मातृत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

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