आदिवासी युवाओं की खेल क्षमता पर राष्ट्रपति का जोर, बताया राष्ट्र की पूंजी

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नई दिल्ली। द्रौपदी मुर्मु ने देश के युवाओं, विशेषकर जनजातीय समुदाय के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को राष्ट्र की अमूल्य सामाजिक पूंजी बताया है। उन्होंने युवाओं से खेलों में सक्रिय भागीदारी और उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

प्राकृतिक प्रतिभा को निखारने पर जोर
राष्ट्रपति ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि भारत के ग्रामीण और वन क्षेत्रों में अपार खेल प्रतिभा मौजूद है, जिसे उचित प्रशिक्षण और संसाधनों के माध्यम से निखारकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है।

संसाधनों के अभाव में भी दिखती है प्रतिभा
उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के बच्चे सीमित संसाधनों के बावजूद प्रकृति के बीच अपने खेल संसार का निर्माण करते हैं। मिट्टी, पेड़ और बीजों जैसे प्राकृतिक साधनों से खेल उपकरण बनाकर वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। यदि इन्हें आधुनिक सुविधाएं मिलें, तो ये वैश्विक मंच पर देश का नाम रोशन कर सकते हैं।

अंजलि मुंडा बनी प्रेरणा
राष्ट्रपति ने खेलो इंडिया जनजातीय खेल 2026 में शानदार प्रदर्शन करने वाली ओडिशा की 15 वर्षीय खिलाड़ी अंजलि मुंडा का उदाहरण देते हुए कहा कि उसने तीन स्वर्ण पदक जीतकर देशभर के युवाओं को प्रेरित किया है।

ऐतिहासिक परंपरा का उल्लेख
उन्होंने जनजातीय समाज में तीरंदाजी जैसी खेल परंपराओं की समृद्ध विरासत का जिक्र किया और संताल हूल जैसे आंदोलनों में जनजातीय वीरों के युद्ध कौशल की सराहना की। साथ ही एकलव्य को युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बताया।

खेल से सामाजिक समरसता और आत्मनिर्भरता
राष्ट्रपति ने कहा कि खेल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, टीम भावना और आत्मविश्वास को भी बढ़ाते हैं। खेलों के माध्यम से युवाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान भी मिल सकता है।

‘खेलो इंडिया’ अभियान की सराहना
उन्होंने खेलो इंडिया अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इससे देश में खेल संस्कृति को मजबूती मिली है और अब ग्रामीण व जनजातीय क्षेत्रों में भी खेल सुविधाओं का विस्तार हो रहा है।

समावेशी खेल इकोसिस्टम की दिशा में कदम
राष्ट्रपति ने कहा कि ‘खेलो इंडिया जनजातीय खेल 2026’ जैसे आयोजन जमीनी स्तर के खिलाड़ियों को पहचान देने का महत्वपूर्ण मंच बन रहे हैं, जिससे देश में एक समावेशी खेल इकोसिस्टम विकसित हो रहा है।

युवाओं को दिया प्रेरक संदेश
अपने संदेश के अंत में राष्ट्रपति ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा— “खेलो इंडिया! खूब खेलो इंडिया!”

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