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22 वर्षीय लॉ स्टूडेंट की इंस्टाग्राम पोस्ट पर गिरफ्तारी, मचा सियासी तूफान

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पश्चिम बंगाल : पश्चिम बंगाल में एक इंस्टाग्राम वीडियो को लेकर 22 वर्षीय लॉ स्टूडेंट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली की गिरफ्तारी ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। इस गिरफ्तारी को लेकर बीजेपी और अन्य विपक्षी दलों ने ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधा है।

मुख्य तथ्य:
• शर्मिष्ठा पनोली ने इंस्टाग्राम पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़े पोस्ट में आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं।
• वीडियो के वायरल होने पर कोलकाता पुलिस ने FIR दर्ज कर गुरुग्राम से गिरफ्तार किया।
• गिरफ्तारी के बाद कोलकाता की अलीपुर कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा।
• शर्मिष्ठा ने वीडियो डिलीट कर बिना शर्त माफी भी मांग ली थी।
• कंगना रनौत, अमित मालवीय और पवन कल्याण ने गिरफ्तारी की आलोचना की।

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कंगना रनौत की प्रतिक्रिया:

“मैं मानती हूं कि शर्मिष्ठा ने कुछ अनुचित शब्दों का इस्तेमाल किया, लेकिन ऐसे शब्द आजकल कई युवा इस्तेमाल करते हैं। मैं बंगाल सरकार से अनुरोध करती हूं कि वह राज्य को दूसरा उत्तर कोरिया न बनाए।”
कंगना ने इस गिरफ्तारी को “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला” बताया और इसे राजनीति से प्रेरित क़दम करार दिया।

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भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय का बयान:

“शर्मिष्ठा के पोस्ट से कहीं भी सांप्रदायिक तनाव नहीं फैला, लेकिन पुलिस ने जल्दबाज़ी में गिरफ्तारी की। ये ममता सरकार की वोट बैंक तुष्टीकरण की राजनीति है।”उन्होंने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि उनके अतीत के भाषण इससे कहीं अधिक विभाजनकारी थे, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
कानूनी पृष्ठभूमि:
• IPC की धार्मिक भावनाएं भड़काने वाली धाराओं के तहत मामला दर्ज।
• गिरफ्तारी के समय शर्मिष्ठा गुरुग्राम में थीं।
• वायरल वीडियो को लेकर सामाजिक मीडिया पर तीव्र प्रतिक्रियाएं आईं।
• माफ़ी मांगने के बावजूद कानूनी कार्रवाई में कोई ढील नहीं दी गई।

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शर्मिष्ठा कौन हैं?

• पुणे की एक लॉ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही हैं।
• इंस्टाग्राम पर 1.75 लाख से ज़्यादा फॉलोअर्स हैं।
• सोशल मीडिया पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से संबंधित मुद्दों पर अक्सर सक्रिय रहती हैं।

इस घटना ने देशभर में अभिव्यक्ति की आज़ादी बनाम धार्मिक सहिष्णुता की बहस को और तेज कर दिया है। कई लोगों ने इसे “चुनिंदा कानूनों के इस्तेमाल” का उदाहरण बताया है, तो कई इसे “सामाजिक ज़िम्मेदारी निभाने की ज़रूरत” का मामला मानते हैं।

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