रांची, 24 अगस्त । माध्यमिक आचार्य भर्ती परीक्षा में 2,819 अभ्यर्थियों की पुनर्परीक्षा से जुड़े मामले में सोमवार को झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
अभ्यर्थियों ने कहा- नहीं की कोई गलती
सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से अदालत को बताया गया कि परीक्षा में उनकी ओर से किसी तरह की गलती नहीं की गई थी। इसके बावजूद उन्हें दोबारा परीक्षा में शामिल होना पड़ा। प्रार्थियों ने आग्रह किया कि पहले आयोजित परीक्षा के आधार पर ही उनका परिणाम जारी करने का निर्देश दिया जाए।
उन्होंने परीक्षा के दौरान संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों को भी गलत बताया और कहा कि उनकी ओर से किसी तरह की अनियमितता नहीं की गई थी।
जेएसएससी ने संदिग्ध गतिविधियों का दिया हवाला
वहीं, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने अदालत को बताया कि माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में करीब 24 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इनमें से 2,819 अभ्यर्थियों की गतिविधियां परीक्षा के दौरान संदिग्ध पाई गई थीं।
उन्होंने बताया कि झारखंड हाई कोर्ट की खंडपीठ के आदेश के अनुरूप इन सभी 2,819 अभ्यर्थियों की पुनर्परीक्षा कराई गई है।
अनधिकृत एक्सेस के मिले थे संकेत
जेएसएससी की ओर से अदालत को बताया गया कि जांच एजेंसी को इन अभ्यर्थियों की परीक्षा के दौरान बाहर से अनधिकृत एक्सेस किए जाने के पुख्ता संकेत मिले थे। जांच में यह भी पता चला कि संबंधित अभ्यर्थियों के कंप्यूटर में किस आईडी के माध्यम से एक्सेस किया गया था।
आयोग के अधिवक्ता ने कहा कि परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी से संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिलने के बाद जेएसएससी ने कार्रवाई की थी। ऐसे में प्रार्थियों का यह कहना उचित नहीं है कि मामले में उनकी कोई संलिप्तता नहीं थी।
आयोग ने पुनर्परीक्षा के फैसले का किया बचाव
जेएसएससी ने अदालत में 2,819 अभ्यर्थियों की पुनर्परीक्षा कराने के अपने फैसले का बचाव किया। आयोग की ओर से कहा गया कि परीक्षा में हैकिंग अथवा किसी तरह के अनधिकृत हस्तक्षेप की स्थिति सामने आने के बाद पुनर्परीक्षा कराना उचित कदम था।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।






