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फागुन की बयार के साथ खादी की बहार, होली बाजार में दिखी जबरदस्त डिमांड

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सुपौल। फागुन की आहट के साथ शहर के बाजारों में उल्लास का रंग चढ़ने लगा है। इस बार की होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि स्वदेशी हुनर की झलक भी पेश कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के आह्वान का असर स्थानीय बाजारों में साफ दिखाई दे रहा है। ग्राहक स्वदेशी वस्त्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

परंपरागत रूप से होली में सफेद कुर्ता-पायजामा, धोती-कुर्ता और सूती साड़ी पहनने का रिवाज रहा है, जो आज भी कायम है। हालांकि गांवों के युवा भी अब शहरों की तरह स्टाइलिश और डिजाइनर कपड़ों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इस बार बाजार में पारंपरिक परिधानों के साथ-साथ होली थीम वाले प्रिंटेड टी-शर्ट, डिजाइनर कुर्ते और इंडो-वेस्टर्न ड्रेस की मांग भी बढ़ी है।

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दुकानों में लिनन, लेटेस्ट रेंज की कुर्तियां, डिजाइनर सूट, सेमी गरारा लुक वाले सूट, मैक्सी गाउन, नेट, शिफॉन और जॉर्जेट के कपड़े सजे हैं। युवतियों के बीच सलमा-सितारा जड़ी कुर्तियां और प्लाजो पहली पसंद बन रही हैं, वहीं युवाओं में खादी जैकेट और कुर्ता-पायजामा का क्रेज बढ़ा है।

शनिचर बाजार में खरीदारी कर रहीं प्रियंका और सीमा कुमारी ने बताया कि उन्होंने 600 रुपये की दर से कॉटन साड़ी खरीदी है। मेन रोड पर खरीदारी कर रहे प्रियांशु कुमार ने बताया कि होली खेलने के लिए 210 रुपये का प्रिंटेड टी-शर्ट और शाम के लिए 600 रुपये का डिजाइनर सफेद कुर्ता-पायजामा लिया है।

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व्यवसायी गोपाल ने बताया कि स्टोन और जरदोसी वर्क वाली डिजाइनर कुर्तियां महिलाओं की पहली पसंद हैं, जिनकी कीमत 1000 रुपये से अधिक है। कम कीमत में आकर्षक साड़ियां और लखनवी कुर्ता भी ग्राहकों को लुभा रहे हैं।

रेडीमेड दुकानों में 250 से 2500 रुपये तक की जींस उपलब्ध है, जबकि गाउन फ्रॉक 2000 रुपये से शुरू हो रहे हैं। युवाओं में कुर्ता-पायजामा की मांग भी काफी है। हालांकि, महंगाई का असर कपड़ों की कीमतों पर साफ नजर आ रहा है, फिर भी त्योहार की उमंग के आगे बजट की चिंता फीकी पड़ती दिख रही है। कुल मिलाकर, इस बार की होली में गांवों में पारंपरिक परिधान और शहरों में स्वदेशी फैशन का तड़का देखने को मिलेगा।

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