लखनऊ, 09 सितंबर । उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों नीले रंग को लेकर बहस तेज हो गई है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि केवल नीले कपड़े और गमछे पहनने या नीला मंच लगाने से गरीबों और उपेक्षित वर्गों के प्रति वर्षों से चली आ रही जातिवादी और पूंजीवादी सोच नहीं बदल सकती।
मायावती ने कहा कि ऐसे दिखावे से कोई व्यक्ति दिल से अंबेडकरवादी नहीं हो जाता। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज के वास्तविक हित और कल्याण के लिए पहले संबंधित दलों को अपना दिल और दिमाग साफ करना चाहिए।
‘कहते कुछ हैं और करते उसके विपरीत’
मायावती ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और सपा गरीब तथा उपेक्षित वर्गों के मुद्दों पर अक्सर अपना रंग बदलते रहते हैं। उन्होंने कहा कि ये दल कहते कुछ हैं और करते उसके ठीक विपरीत हैं।
सपा के पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) के मुद्दे का जिक्र करते हुए मायावती ने उसकी सोच, चाल, चरित्र और चेहरे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इसके कई उदाहरण सामने आ चुके हैं।
बसपा प्रमुख ने दावा किया कि बहुजन समाज के हित और अंबेडकरवादी विचारधारा की सच्ची हितैषी केवल बसपा है।
बसपा से निकाले गए लोगों को बताया अवसरवादी
मायावती ने बसपा से अनुशासनहीनता सहित विभिन्न कारणों से निकाले गए नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पार्टी से निकाले जाने के बाद ऐसे कई लोग अलग-अलग दलों में जा चुके हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोग स्वार्थी और अवसरवादी हैं और किसी भी पार्टी के हित में नहीं हो सकते। मायावती ने यह भी कहा कि कुछ निष्कासित लोग दूसरी पार्टियों के इशारे पर छोटी-छोटी पार्टियां और संगठन बना लेते हैं, लेकिन इससे बहुजन समाज का सामूहिक हित पूरा नहीं हो सकता।
‘बिना गठबंधन चुनाव नहीं लड़ सकतीं ऐसी पार्टियां’
बसपा प्रमुख ने कहा कि ऐसी छोटी पार्टियां अक्सर बिना किसी गठबंधन के चुनाव लड़ने की स्थिति में भी नहीं होतीं। सरकार बनने की स्थिति में वे सत्ता में शामिल हुए बिना भी नहीं रह सकतीं।
उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक दल बसपा से निकाले गए लोगों को अपनी पार्टी में लेने या उन्हें अलग पार्टी बनाने की सलाह दे रहे हैं, उन्हें पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए।
कांग्रेस को बताया ‘डूबता हुआ जहाज’
मायावती ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वह ऐसे निष्कासित नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करने की बात कर रही है, लेकिन कांग्रेस उनके अनुसार ‘डूबते हुए जहाज’ की तरह है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर कौन ऐसे जहाज में शामिल होकर अपना राजनीतिक भविष्य अंधकार में डालना चाहेगा।
उन्होंने यह भी दावा किया कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने अपने जीवनकाल में बहुजन समाज के लोगों को कांग्रेस से दूरी बनाए रखने की चेतावनी दी थी। मायावती ने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में बसपा और बहुजन आंदोलन से जुड़े लोगों के लिए इन बातों को समझना जरूरी है।
अशोक सिद्धार्थ के संन्यास पर भी मायावती का बयान
मायावती ने अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जिस दिन बसपा ने अशोक सिद्धार्थ से राजनीति से संन्यास लेने को कहा, उस दिन उन्होंने तत्काल संन्यास की घोषणा नहीं की थी।
मायावती के अनुसार, उस रात उन्हें निर्णय रोकने के लिए तरह-तरह के प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिलने के बाद अगले दिन अशोक सिद्धार्थ को संन्यास की घोषणा करनी पड़ी।
उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के बारे में सही समय आने पर पार्टी के लोगों को और भी जानकारी दी






