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जेपीएससी की पारदर्शिता पर भाजयुमो ने उठाए सवाल, 20 से 22 जुलाई तक आंदोलन का ऐलान

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रांची, 18 जुलाई। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आयोग पर अपारदर्शिता, अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष शशांक राज ने शनिवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में कहा कि जेपीएससी राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा संस्थान है, लेकिन इसकी कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में है।

परिणाम जारी करने की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

शशांक राज ने हाल ही में घोषित जेपीएससी परीक्षा परिणामों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि परिणाम आयोग के सभी सदस्यों के हस्ताक्षरों के बिना जारी किए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आयोग के तीन सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे, तो परिणाम किस नियम और अधिकार के तहत जारी किया गया। उन्होंने पूरी चयन प्रक्रिया की वैधता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए।

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20 से 22 जुलाई तक चरणबद्ध आंदोलन

भाजयुमो ने जेपीएससी के खिलाफ तीन दिवसीय आंदोलन की घोषणा की है।

  • 20 जुलाई: पूरे राज्य में सोशल मीडिया अभियान।
  • 21 जुलाई: सभी जिला मुख्यालयों में मशाल जुलूस।
  • 22 जुलाई: “चलो जेपीएससी घेरते हैं” अभियान के तहत रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से जेपीएससी कार्यालय तक मार्च और घेराव।

इस दौरान प्रतीकात्मक रूप से “जेपीएससी सफाई अभियान” भी चलाया जाएगा।

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प्रतियोगी छात्रों के साथ खड़े होने का दावा

शशांक राज ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि कथित भ्रष्ट और अपारदर्शी व्यवस्था के विरोध में है। उन्होंने कहा कि भाजयुमो राज्य के लाखों प्रतियोगी छात्रों के अधिकारों की लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से लड़ता रहेगा।

पूर्व कार्यप्रणाली का दिया उदाहरण

भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष नीलिमा केरकेट्टा के कार्यकाल में सभी आवश्यक हस्ताक्षरों के बिना कभी परीक्षा परिणाम जारी नहीं किए जाते थे। उन्होंने वर्ष 2011-13 के जेपीएससी प्रकरण का भी उल्लेख करते हुए चयन प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।

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आरटीआई और कट-ऑफ को लेकर भी आरोप

शशांक राज ने आरोप लगाया कि सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत अभ्यर्थियों को उनकी उत्तर पुस्तिकाओं का अवलोकन नहीं कराया जाता और न ही उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाती हैं। उन्होंने कहा कि आयोग परीक्षा का कट-ऑफ अंक भी सार्वजनिक नहीं करता, जिससे चयन प्रक्रिया पर संदेह उत्पन्न होता है।

परीक्षा कैलेंडर और आयु सीमा पर भी उठाए मुद्दे

उन्होंने आरोप लगाया कि जेपीएससी अक्सर देर रात परीक्षा परिणाम जारी करता है और वर्षों से नियमित परीक्षा कैलेंडर जारी करने में विफल रहा है। इसके कारण प्रतियोगी छात्रों को तैयारी और भविष्य की योजना बनाने में कठिनाई होती है।

शशांक राज ने राज्य सरकार से सरकारी नौकरियों में अधिकतम आयु सीमा बढ़ाने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष तक है, जबकि झारखंड के कई अभ्यर्थी कम आयु सीमा के कारण अवसरों से वंचित हो रहे हैं।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

भाजयुमो ने चेतावनी दी कि यदि जेपीएससी की कार्यप्रणाली को पारदर्शी, जवाबदेह और निष्पक्ष नहीं बनाया गया, तो युवाओं का लोकतांत्रिक आंदोलन और व्यापक किया जाएगा।

प्रेसवार्ता में भाजयुमो के प्रदेश उपाध्यक्ष राहुल चौधरी, प्रदेश मीडिया प्रभारी प्रिंस कुमार तथा प्रदेश प्रवक्ता बबन बैठा भी उपस्थित थे।

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