पश्चिमी सिंहभूम, 11 मई । पश्चिमी सिंहभूम जिले की गुवा लौह अयस्क खदान में स्थानीय लोगों को रोजगार देने की मांग को लेकर सोमवार तड़के शुरू हुआ अनिश्चितकालीन चक्का जाम आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। आंदोलन के कारण खदान क्षेत्र में उत्पादन और लौह अयस्क परिवहन प्रभावित होने लगा है।
500 स्थानीय युवकों को रोजगार देने की मांग
मानकी सुरेश चांपिया के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में खदान प्रभावित कई गांवों के मुंडा, मानकी, मुखिया और ग्रामीण शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक सेल प्रबंधन 500 स्थानीय बेरोजगार युवकों को रोजगार देने पर लिखित समझौता नहीं करता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
ग्रामीणों ने गुवा खदान के मेन गेट, क्रशिंग प्लांट, लोडिंग प्वाइंट और रांजाबुरु क्षेत्र में आवाजाही पूरी तरह रोक दी है। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में सीआईएसएफ जवानों की तैनाती की गई है।
जमीन-जंगल प्रभावित, रोजगार नहीं मिलने का आरोप
आंदोलनकारियों का आरोप है कि खदान विस्तार और खनन गतिविधियों के कारण स्थानीय लोगों की जमीन, जंगल और जल स्रोत प्रभावित हुए हैं, लेकिन बदले में उन्हें रोजगार नहीं मिला।
काशिया पेचा गांव के मंगता सुरीन ने कहा कि ग्रामीण वर्षों से प्रदूषण, विस्थापन और बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। अब वे सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी रोजगार चाहते हैं।
“लाल पानी” से खेती प्रभावित होने का आरोप
ग्रामीणों ने कारो नदी में बह रहे कथित प्रदूषित “लाल पानी” का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि खदान से निकलने वाला दूषित पानी खेतों और जल स्रोतों को नुकसान पहुंचा रहा है, जिससे खेती-बाड़ी प्रभावित हो रही है।
आंदोलनकारियों ने झारखंड की 75 प्रतिशत स्थानीय नियोजन नीति को सख्ती से लागू करने तथा रांजाबुरु खदान में हैंड माइनिंग और मैनुअल रैक लोडिंग शुरू करने की मांग भी रखी है।

पूर्व सीएम मधु कोड़ा की मौजूदगी में भी नहीं बनी सहमति
कुछ दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की मौजूदगी में सेल अधिकारियों और ग्रामीण प्रतिनिधियों के बीच वार्ता हुई थी, लेकिन कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी।
जानकारी के अनुसार सेल प्रबंधन फिलहाल 25 लोगों को रोजगार देने की बात कह रहा है, जबकि आंदोलनकारी इसे नाकाफी बता रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सम्मानजनक संख्या में स्थानीय युवाओं की नियुक्ति होने तक आंदोलन जारी रहेगा।





