रांची: झारखंड सरकार विकास योजनाओं को गति देने और ग्रामीण क्षेत्रों को सशक्त बनाने की दिशा में लगातार विभागीय समीक्षा बैठकें कर रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की प्राथमिकता राज्य को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ गांव, गरीब और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। हाल ही में हुई बैठकों में कई महत्वपूर्ण योजनाओं और नीतियों पर विशेष फोकस देखने को मिला।
पंचायत स्तर पर डिजिटल सेवाओं की तैयारी
ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ग्रामीणों को छोटे-छोटे काम के लिए अंचल कार्यालय का चक्कर न लगाना पड़े। इसके लिए पंचायत स्तर पर डिजिटल व्यवस्था मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है।
सरकार की योजना है कि गांवों में ही लोगों को प्रमाण पत्र, सरकारी योजनाओं की जानकारी और अन्य जरूरी सेवाएं आसानी से मिल सकें। इससे ग्रामीणों को समय और खर्च दोनों की बचत होगी।
JETET भाषा विवाद पर जल्द फैसला संभव
लंबे समय से चर्चा में रहे JETET भाषा विवाद को लेकर भी सरकार सक्रिय नजर आ रही है। ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि इस मामले को लेकर गठित कमेटी अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप चुकी है। अब अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों और अभ्यर्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक फैसला लेने की दिशा में काम कर रही है। ऐसे में हजारों अभ्यर्थियों की नजर अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।
PESA नियमावली लागू करने पर विशेष फोकस
राज्य सरकार अनुसूचित क्षेत्रों में PESA नियमावली को प्रभावी तरीके से लागू करने को लेकर भी गंभीर दिखाई दे रही है। पंचायती राज विभाग की ओर से NGO, जनप्रतिनिधियों और पारंपरिक ग्राम प्रधानों के साथ लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
सरकार का मानना है कि ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार मिलने और स्थानीय भागीदारी बढ़ने से आदिवासी एवं ग्रामीण इलाकों में विकास योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव होगा। साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था भी मजबूत होगी।
गांव, गरीब और महिला सशक्तिकरण पर सरकार का फोकस
कुल मिलाकर राज्य सरकार की समीक्षा बैठकों में गांव, गरीब, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय अधिकारों को केंद्र में रखकर योजनाओं को जमीन पर उतारने की तैयारी दिखाई दे रही है। अब देखना होगा कि सरकार की ये योजनाएं कितनी तेजी से आम लोगों तक पहुंच पाती हैं।






