पटना: बिहार में पुलों की सुरक्षा और संरचनात्मक स्थिति की समीक्षा को लेकर पथ निर्माण विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में 60 मीटर से अधिक लंबाई वाले पुलों की जांच रिपोर्ट की समीक्षा की गई। राज्यभर में ऐसे कुल 638 पुलों की जांच पूरी कर ली गई है।
समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि पश्चिम चंपारण, पटना, मुजफ्फरपुर, अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार, सुपौल, पूर्वी चंपारण, दरभंगा, गया, नवादा, जमुई और सहरसा समेत विभिन्न जिलों के 638 पुलों का विस्तृत निरीक्षण किया गया।
जांच में 23 पुल गंभीर स्थिति में पाए गए हैं। इनमें से 10 पुलों पर मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का कार्य चल रहा है, जबकि 5 अत्यंत संवेदनशील स्थानों पर नए पुलों का निर्माण कराया जाएगा। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए 4 पुलों पर भारी वाहनों के आवागमन पर फिलहाल रोक लगाई गई है और केवल हल्के वाहनों को ही चलने की अनुमति दी गई है। एक अन्य संवेदनशील स्थल पर वैकल्पिक डायवर्जन निर्माण का कार्य भी जारी है।
बैठक में यह भी बताया गया कि 8 पुलों के रखरखाव और मरम्मत के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा रही है। सचिव ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि टेंडर की प्रक्रिया जल्द पूरी कर कार्य प्रारंभ कराया जाए।
इसके अलावा 50 पुल ऐसे पाए गए हैं, जिनमें सामान्य मरम्मत और सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता है। इन पुलों पर विभागीय अभियंताओं की निगरानी में तेजी से काम कराया जा रहा है। सचिव ने सभी जांच रिपोर्टों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया कि जिन पुलों में किसी भी प्रकार की तकनीकी कमजोरी या क्षति पाई गई है, वहां युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य कराया जाए।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि राज्य के 250 मीटर से अधिक लंबाई वाले 47 महत्वपूर्ण और लाइफलाइन माने जाने वाले पुलों की जांच IIT Patna द्वारा की गई है। संस्थान की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
सचिव पंकज कुमार पाल ने अधिकारियों को पुलों की निगरानी व्यवस्था और अधिक मजबूत बनाने का निर्देश दिया ताकि संभावित क्षति की समय रहते जानकारी मिल सके और किसी भी बड़ी दुर्घटना को रोका जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि जिन प्रमंडलों में कार्य की गति धीमी पाई जाएगी या गुणवत्ता में कमी मिलेगी, वहां संबंधित अभियंताओं के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि राज्य में सुरक्षित और सुगम आवागमन सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और पुलों की सुरक्षा एवं रखरखाव के मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।






