पटना: बिहार सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कार्यरत श्रमिकों के बकाया भुगतान के लिए 990 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की है। इस फैसले से राज्य के लाखों मनरेगा मजदूरों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से मजदूरी भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे थे।
ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी राशि में केंद्र और राज्य सरकार दोनों का अंश शामिल है। विभाग का कहना है कि इस वित्तीय सहायता का उद्देश्य श्रमिकों के लंबित भुगतान को समय पर पूरा करना और ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही विकास योजनाओं की रफ्तार बनाए रखना है।
अधिकारियों के अनुसार, राशि उपलब्ध होने के बाद भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी, ताकि पात्र श्रमिकों के बैंक खातों में मजदूरी सीधे और समय पर पहुंच सके। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ रोजगार आधारित विकास कार्यों को भी गति मिलेगी।
मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों के इच्छुक वयस्क सदस्यों को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों तक अकुशल रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान है। योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण, जल संरक्षण, तालाब निर्माण, नहर सफाई और अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों के निर्माण जैसे कार्य कराए जाते हैं।
बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मनरेगा से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए। साथ ही नए आवेदकों को तय अवधि के भीतर जॉब कार्ड उपलब्ध कराने पर भी विशेष जोर दिया गया है।
सरकार का मानना है कि इस वित्तीय आवंटन से श्रमिकों का भरोसा मजबूत होगा, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में नई ऊर्जा का संचार होगा।





