बांकीपुर उपचुनाव: भाजपा के अभेद्य गढ़ में प्रशांत किशोर की एंट्री, हाई-प्रोफाइल सीट पर प्रतिष्ठा की लड़ाई, क्या 45 साल पुराना किला बचा पाएगी BJP?

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पटना — राजधानी पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट (182) पर उपचुनाव का बिगुल बज चुका है। यह मुकाबला सिर्फ एक सीट तक सीमित नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। एक ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने चार दशक पुराने मजबूत गढ़ को बचाने की चुनौती से जूझ रही है, वहीं दूसरी ओर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर इसे अपनी राजनीतिक साख का बड़ा अवसर मान रहे हैं।

मतदाता और चुनाव कार्यक्रम
निर्वाचन आयोग के अनुसार, बांकीपुर में कुल 3,78,268 मतदाता हैं, जिनमें 1,99,591 पुरुष, 1,78,653 महिलाएं और 24 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।

  • नामांकन शुरू: 6 जुलाई 2026
  • अंतिम तिथि: 13 जुलाई
  • मतदान: 30 जुलाई
  • मतगणना: 3 अगस्त 2026

यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है।

45 साल से BJP का गढ़
बांकीपुर को भाजपा का अभेद्य किला माना जाता है। नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा और बाद में नितिन नवीन ने यहां मजबूत राजनीतिक आधार बनाया। 2006 के उपचुनाव से लेकर अब तक नितिन नवीन लगातार जीतते रहे।
2020 और 2025 के चुनावों में भी भाजपा ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की, जिससे इस सीट पर पार्टी की मजबूत पकड़ स्पष्ट होती है।

प्रशांत किशोर की एंट्री से मुकाबला दिलचस्प
जन सुराज ने इस उपचुनाव में पूरी ताकत झोंक दी है। प्रशांत किशोर ने संकेत दिए हैं कि भाजपा को हराने के लिए वे खुद भी मैदान में उतर सकते हैं।
अगर ऐसा होता है, तो यह चुनाव सीधे भाजपा बनाम प्रशांत किशोर की प्रतिष्ठा की लड़ाई बन जाएगा।

जन सुराज का जमीनी अभियान
प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती की अगुवाई में पार्टी लगातार जनसंपर्क अभियान चला रही है। मोहल्ला बैठकों, व्यापारिक संगठनों और स्थानीय समूहों से संवाद के जरिए जनमत तैयार किया जा रहा है।
पार्टी का दावा है कि उम्मीदवार का चयन जनता के फीडबैक के आधार पर होगा।

सामाजिक समीकरण BJP के पक्ष में
यह सीट पूरी तरह शहरी है, जहां मध्यम वर्ग, व्यापारी, पेशेवर और कायस्थ-वैश्य मतदाताओं का प्रभाव है। यही वर्ग वर्षों से भाजपा का मजबूत वोट बैंक रहा है।
हालांकि इस बार नितिन नवीन के मैदान में न होने से समीकरण बदल सकते हैं।

उम्मीदवार चयन BJP के लिए चुनौती
भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक मजबूत और स्थानीय रूप से लोकप्रिय उम्मीदवार चुनने की है।
चर्चाओं में कई नाम सामने आ रहे हैं—

  • परिवार से उम्मीदवार उतारने की संभावना
  • स्थानीय वरिष्ठ भाजपा नेता
  • विधान परिषद सदस्य संजय मयुख
  • प्रवक्ता डॉ. अजय आलोक

हालांकि पार्टी ने अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

प्रतिष्ठा की सीधी लड़ाई
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह चुनाव भाजपा की संगठनात्मक ताकत और शहरी जनाधार की परीक्षा है। वहीं, प्रशांत किशोर के लिए यह खुद को एक गंभीर राजनीतिक विकल्प साबित करने का मौका है।

अगर भाजपा सीट बचा लेती है, तो उसका वर्चस्व कायम रहेगा। लेकिन अगर विपक्ष सेंध लगाने में सफल होता है, तो यह बिहार की राजनीति में बड़ा संदेश देगा।

नजरें पूरे देश की
बांकीपुर उपचुनाव अब सिर्फ पटना या बिहार तक सीमित नहीं रहा। राष्ट्रीय स्तर पर भी इस सीट पर नजरें टिकी हैं। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की घोषणा और चुनाव प्रचार इस मुकाबले को और अधिक रोमांचक बनाएंगे।

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