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पहलगाम हमले की जांच में बड़ा खुलासा: आतंकियों से मिले फोन का पाकिस्तान कनेक्शन, हमले से पहले हुए थे एक्टिव

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नई दिल्ली : Pahalgam Terror Attack की जांच में सुरक्षा एजेंसियों को एक अहम सुराग मिला है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और जम्मू-कश्मीर पुलिस की पड़ताल में आतंकियों के पास से बरामद दो मोबाइल फोन पाकिस्तान से जुड़े पाए गए हैं। जांच में सामने आया है कि ये फोन वर्षों तक बंद रहे और पहलगाम हमले से ठीक पहले सक्रिय किए गए।

मुठभेड़ के बाद मिले थे दोनों मोबाइल

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन इलाके में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकियों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया। 28 जुलाई 2025 को दाचीगाम के मुलनार महादेव इलाके में हुई मुठभेड़ के बाद तीन आतंकियों के शवों के पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए गए।

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इनमें एक Xiaomi Redmi 9T और दूसरा Xiaomi Redmi Note 12 था।

पाकिस्तान से जुड़ी निकली सप्लाई चेन

जांच एजेंसियों ने मोबाइल कंपनियों से फोन के रिकॉर्ड जुटाए। इसमें पता चला कि रेडमी 9टी 2021 में पाकिस्तान पहुंची एक आयात खेप का हिस्सा था। वहीं दूसरा फोन रेडमी नोट 12 भी पाकिस्तान की दूसरी आयात खेप से जुड़ा मिला। इसके बाद जांच का फोकस इन मोबाइल की सप्लाई चेन और आतंकियों तक पहुंचने के रास्ते पर आ गया है।

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चार साल तक बंद रहे, हमले से पहले हुए एक्टिव

जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि दोनों फोन पाकिस्तान पहुंचने के बाद लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं किए गए। अधिकारियों के मुताबिक इन्हें पहली बार पहलगाम हमले की तैयारी के दौरान सक्रिय किया गया। इससे आशंका जताई जा रही है कि इन उपकरणों को किसी खास मकसद से सुरक्षित रखा गया था और बाद में आतंकियों तक पहुंचाया गया।

फोन से मिले नक्शे और तस्वीरें

बरामद मोबाइल फोन से सुरक्षा एजेंसियों को पहलगाम के बैसरन मैदान और आसपास के इलाकों के नक्शे और कई तस्वीरें मिली हैं। इनमें एक तस्वीर 30 मार्च 2025 की बताई जा रही है, जिसमें एक टेंट नजर आ रहा है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि आतंकी हमले से कई हफ्ते पहले इलाके में डेरा डाले हुए थे और लगातार रेकी कर रहे थे।

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कॉल रिकॉर्ड नहीं, जांच जारी

जांचकर्ताओं को मोबाइल फोन से कोई कॉल रिकॉर्ड या मैसेज नहीं मिले हैं। माना जा रहा है कि आतंकी संचार के लिए रेडियो या अन्य वैकल्पिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे थे। फिलहाल National Investigation Agency और जम्मू-कश्मीर पुलिस इस बात की जांच में जुटी है कि ये फोन पाकिस्तान से आतंकियों तक कैसे पहुंचे और हमले की साजिश में इनकी क्या भूमिका रही।

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