वेतन वृद्धि आंदोलन की आड़ में रची गई साजिश, QR कोड और सोशल मीडिया से भड़काई गई भीड़
रांची/नोएडा: दिल्ली से सटे नोएडा के फेज-2 स्थित होजरी कॉम्प्लेक्स में मजदूरों के वेतन वृद्धि आंदोलन के दौरान हुई हिंसा को लेकर पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच के मुताबिक यह हिंसा अचानक भड़की घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी।
पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी हजारीबाग निवासी और एनआईटी जमशेदपुर का पूर्व छात्र आदित्य आनंद है, जो फिलहाल फरार है। उसके साथ बिहार के ऑटो चालक रूपेश रॉय और मनीषा चौहान भी साजिश में शामिल थे। पुलिस ने रूपेश और मनीषा को 11 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि आदित्य की तलाश में लगातार छापेमारी जारी है।
डिजिटल नेटवर्क से तैयार की गई हिंसा की जमीन
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने पहले से ही भीड़ को संगठित करने की योजना बना ली थी। 31 मार्च और 1 अप्रैल को नोएडा पहुंचने के बाद 9 और 10 अप्रैल को इन्होंने औद्योगिक क्षेत्रों में QR कोड स्कैन कराकर कई व्हाट्सएप ग्रुप बनाए। इन ग्रुप्स में हजारों मजदूरों को जोड़ा गया और फिर भड़काऊ संदेशों के जरिए उन्हें हिंसा के लिए उकसाया गया।
सोशल मीडिया पर फैलाई गई फर्जी खबरें
घटना के दौरान सोशल मीडिया पर भी अफवाहों का दौर तेज रहा। पुलिस जांच में दो एक्स (ट्विटर) हैंडल—अनुषी तिवारी और मीर इलियास—की पहचान हुई है, जिनसे मजदूरों की मौत जैसी झूठी खबरें और भ्रामक वीडियो फैलाए गए। तकनीकी जांच में ये अकाउंट पाकिस्तान से संचालित पाए गए हैं।
पुराना रिकॉर्ड भी संदिग्ध
पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी आदित्य आनंद वर्ष 2020 से देश के विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय रहा है और उन्हें हिंसक मोड़ देने की कोशिशों में शामिल रहा है। उसकी मौजूदगी दिल्ली में हुए CAA-NRC प्रदर्शनों के दौरान भी दर्ज की गई थी।
पुलिस की कार्रवाई तेज
नोएडा पुलिस ने मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित की हैं। साथ ही व्हाट्सएप ग्रुप्स और डिजिटल डेटा की जांच कर अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है। प्रशासन ने औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी है और लोगों से अफवाहों से दूर रहने की अपील की है।






