झारखंड हाईकोर्ट को मिले तीन नए जज, पीडीजे मनोज प्रसाद, अखिल कुमार और राम शर्मा ने ली शपथ, न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 16 हुई

Share

रांची, 23 सितंबर । झारखंड उच्च न्यायालय में बुधवार को तीन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पीडीजे) ने न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। इनमें मनोज प्रसाद, अखिल कुमार और राम शर्मा शामिल हैं। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक ने तीनों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। तीनों के शपथ लेने के साथ ही झारखंड उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 16 हो गई।

उच्च न्यायालय के ग्राउंड फ्लोर पर हुआ शपथ ग्रहण समारोह

शपथ ग्रहण समारोह झारखंड उच्च न्यायालय के ग्राउंड फ्लोर पर आयोजित किया गया। समारोह की शुरुआत तीनों नवनियुक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित वारंट पढ़े जाने के साथ हुई।

इसके बाद क्रमवार शपथ ग्रहण कराया गया। सबसे पहले मनोज प्रसाद ने, उसके बाद अखिल कुमार और अंत में राम शर्मा ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। समारोह में उच्च न्यायालय के सभी न्यायाधीशों के अलावा अन्य अतिथि भी मौजूद रहे।

शपथ के बाद तीनों ने संभाली न्यायिक जिम्मेदारी

शपथ लेने के बाद तीनों नवनियुक्त न्यायाधीशों ने उसी दिन अलग-अलग खंडपीठ में बैठकर सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई भी की।

मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक के साथ न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद, न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद के साथ न्यायमूर्ति अखिल कुमार और न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय के साथ न्यायमूर्ति राम शर्मा की खंडपीठ ने विभिन्न मामलों की सुनवाई की।

शपथ लेने से पहले मनोज प्रसाद गढ़वा, अखिल कुमार साहेबगंज और राम शर्मा डालटनगंज में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर पदस्थापित थे।

मनोज प्रसाद ने देवघर से शुरू किया न्यायिक सफर

न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद का जन्म वर्ष 1973 में देवघर में हुआ। उन्होंने सेंट फ्रांसिस स्कूल, देवघर से स्कूली शिक्षा हासिल की। वर्ष 1988 में आईसीएसई से दसवीं और 1990 में पटना कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

वर्ष 1998 में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की डिग्री हासिल की। इसके अगले वर्ष 1999 में बिहार स्टेट बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया।

उन्होंने देवघर जिला न्यायालय में मुख्य रूप से सिविल मामलों की वकालत की। इसके बाद चार मई 2012 को वे एडिशनल ज्यूडिशियल कमिश्नर, रांची के रूप में झारखंड सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विस में शामिल हुए। न्यायिक सेवा में विभिन्न पदों पर जिम्मेदारी निभाने के बाद वे प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बने।

अखिल कुमार ने पटना से शुरू किया पेशेवर सफर

न्यायमूर्ति अखिल कुमार का जन्म छह जनवरी 1972 को पटना में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा पटना में हुई। वर्ष 1986 में मैट्रिक और 1988 में पटना कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने पटना विश्वविद्यालय के पटना कॉलेज से समाजशास्त्र में ऑनर्स के साथ स्नातक किया।

वर्ष 1999 में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की डिग्री हासिल की। उसी वर्ष अधिवक्ता के रूप में नामांकन के बाद उन्होंने पटना उच्च न्यायालय और पटना जिला न्यायालय में सिविल एवं आपराधिक मामलों की वकालत की।

इसके बाद वे न्यायिक सेवा में शामिल हुए और विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए साहेबगंज के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद तक पहुंचे। अब उन्होंने झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है।

राम शर्मा का दिल्ली से झारखंड उच्च न्यायालय तक सफर

न्यायमूर्ति राम शर्मा का जन्म सात जुलाई 1968 को दिल्ली में हुआ। उन्होंने सीबीएसई से स्कूली शिक्षा पूरी की। वर्ष 1984 में मैट्रिक और 1986 में इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने कानून की पढ़ाई की।

वर्ष 1994 में एलएलबी की डिग्री हासिल करने के बाद उसी वर्ष दिल्ली बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया। उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय और विभिन्न जिला अदालतों में सिविल एवं आपराधिक मामलों की वकालत की।

2012 में न्यायिक सेवा से जुड़े थे राम शर्मा

राम शर्मा 26 मई 2012 को झारखंड सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विस में शामिल हुए। न्यायिक सेवा के दौरान उन्होंने विभिन्न पदों पर जिम्मेदारी निभाई और डालटनगंज के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद तक पहुंचे।

बुधवार को उन्होंने झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में शपथ लेकर उच्च न्यायालय की न्यायिक व्यवस्था में नई जिम्मेदारी संभाली।

Share this article

Facebook
Twitter X
WhatsApp
Telegram
 
November 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
30