झारखंड में SIR पर सियासी संग्राम, बीजेपी–झामुमो आमने-सामने

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रांची: झारखंड में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) को लेकर राजनीति गरमा गई है। इस मुद्दे पर बीजेपी और झामुमो के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है, जिससे प्रदेश की सियासत में नया विवाद खड़ा हो गया है।

क्या है पूरा विवाद?
SIR को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।

  • बीजेपी का आरोप है कि राज्य सरकार घुसपैठियों को बसाने की कोशिश कर रही है और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी हो सकती है।
  • वहीं झामुमो ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि एक भी फर्जी वोटर नहीं जोड़ा जाएगा और न ही किसी असली मतदाता का नाम हटेगा।

बीजेपी का हमला
बीजेपी नेता आदित्य ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री SIR के नाम पर मतदाताओं को भ्रमित कर रहे हैं। पार्टी का कहना है कि इस प्रक्रिया के जरिए वोट बैंक की राजनीति की जा रही है।

झामुमो का पलटवार
झामुमो नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने बीजेपी के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा:

  • “एक भी वोटर नहीं छूटेगा।”
  • “न कोई फर्जी वोट जुड़ेगा, न किसी का नाम कटेगा।”
  • “बंगाल की तरह 18 लाख वोटरों को वंचित करने वाली स्थिति झारखंड में नहीं बनने देंगे।”

उन्होंने घाटशिला क्षेत्र की हेदरडी पंचायत का उदाहरण देते हुए कहा कि जमीनी हकीकत बीजेपी के आरोपों से बिल्कुल अलग है।

चुनाव आयोग की भूमिका पर बयान
झामुमो ने यह भी स्पष्ट किया कि घर-घर गणना करना चुनाव आयोग का काम नहीं है और इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।

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