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अयोध्या में भक्ति का माहौल, राष्ट्रपति ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में स्थापित किया ‘श्रीराम यंत्र’

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-एयरपोर्ट पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति का किया स्वागत

-महापाैर ने प्रतीकात्मक सम्मान में राष्ट्रपति काे साैंपी नगर की चाबी

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अयोध्या: चैत्र नवरात्र के प्रथम दिन गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में सनातन नव संवत्सर के अवसर पर श्रीराम यंत्र की स्थापना की। यह श्रीराम यंत्र जन्मभूमि मंदिर के द्वितीय तल के गर्भगृह में अभिजीत मुहूर्त में वैदिक आचार्यों ने मंत्रोच्चार विधिवत पूजा अर्चना कर स्थापित कराया। राष्ट्रपति मुर्मु का अयाेध्यावासियाें ने एयरपाेर्ट से मंदिर तक भव्य स्वागत किया।

गुरुवार काे राष्ट्रपति मुर्मु के अयाेध्या पहुंचने पर महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुष्पगुच्छ देकर उनका स्वागत किया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे। महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने राष्ट्रपति का अभिवादन करते हुए उन्हें ‘नगर की चाबी’ भेंट की। यह सम्मान अतिथि को नगर की ओर से दिया जाने वाला सर्वोच्च प्रतीकात्मक सम्मान माना जाता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु दूसरी बार अयोध्या पहुंची हैं।

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एयरपाेर्ट से मंदिर के रास्ते हुए सांस्कृतिक आयाेजन

इसके बाद एयरपोर्ट से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के लिए राष्ट्रपति का काफिला रवाना हुआ। पूरे मार्ग पर उत्सव जैसा दृश्य देखने को मिला। सड़क के दोनों ओर करीब 20 सांस्कृतिक मंच सजाए गए थे, जहां लगभग 250 कलाकारों ने रामायण आधारित प्रस्तुतियों के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। भारतीय वेशभूषा में कलाकारों ने स्वागत गीत, भजन, अवधी-भोजपुरी लोकगायन-लोकनृत्य समेत भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत कार्यक्रमों के जरिए मन मोह लिया।

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अयोध्यावासियों ने पुष्प वर्षा कर किया स्वागत

अयोध्यावासियों ने भी सड़क किनारे खड़े होकर पुष्प वर्षा की और जयकारों कर देश की प्रथम नागरिक का गर्मजोशी से स्वागत किया। राष्ट्रपति ने भी अयोध्यावासियों का अभिवादन किया। कार्यक्रम को और भव्य बनाने के लिए रास्ते के सांस्कूतिेक मंचाें पर रामलीला के अंश, झांकियां, ढोल-नगाड़ा, शंखनाद, वेदपाठ और भजन-कीर्तन जैसी पारंपरिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं, जिससे अयोध्या की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। राष्ट्रपति के आगमन पर सजी अयोध्या नगरी में हर ओर श्रद्धा, उत्साह और उल्लास का वातावरण दिखा।

मंदिर के दूसरे तल पर स्थापित किया गया श्रीरामयंत्र

राष्ट्रपति मुर्मु ने श्रीराम मंदिर पहुंचने पर सर्वप्रथम प्रभु श्रीरामलला के दर्शन कर पूजा व आरती की। तत्पश्चात “श्रीराम यंत्र” स्थापना का विधान सम्पन्न कराया। संपूर्ण विधि विधान से “श्रीराम यंत्र” की स्थापना के साथ ही श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण नए इतिहास का साक्षी बन गया। “श्रीराम यंत्र” की स्थापना होते ही श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में प्रभु श्री राम के जयघोष से गुंजायमान हो गया। राष्ट्रपति ने श्रीराम मंदिर परिसर का भ्रमण कर यहां की दीवारों पर उकेरी गईं आकृतियों का भी अवलोकन किया। यंत्र स्थापना के समय राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केरल से आईं मां अमृतानंदमयी, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि, ट्रस्टी अनिल मिश्रा, सदस्य गोपाल के अलावा साधु संत एवं देश विदेश से आए सात हजार से अधिक गणमान्य उपस्थित रहे।

शंकराचार्य विजयेंद्र ने भेजा है श्रीराम यंत्र

यह श्रीराम यंत्र दो वर्ष पूर्व जगद्गुरु शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती महाराज ने शोभायात्रा के माध्यम से अयोध्या भेजा था। वैदिक गणित और ज्यामितीय आकृतियों पर आधारित यह यंत्र देवताओं का निवास माना जाता है, जो सकारात्मक ऊर्जा आकर्षित करने की क्षमता रखता है। दक्षिण भारत, काशी, अयोध्या के आचार्यों द्वारा मंदिर में श्रीराम यंत्र के लिए नौ दिवसीय वैदिक अनुष्ठान पहले से ही शुरू हो चुका था।

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