खूंटी, 03 सितंबर: खूंटी जिले के जंगलों से सटे गांवों में इन दिनों रात का सन्नाटा ग्रामीणों के लिए डर का सबब बना हुआ है। तोरपा, कर्रा और रनिया प्रखंड के हाथी प्रभावित गांवों में शाम ढलते ही ग्रामीण सतर्क हो जाते हैं। जंगल से निकलकर हाथियों का झुंड कब गांव और खेतों तक पहुंच जाए, इसे लेकर ग्रामीणों में हर समय चिंता बनी रहती है। करीब दर्जनभर जंगली हाथियों का झुंड पिछले कई दिनों से रनिया क्षेत्र में सक्रिय है और खेतों में लगी फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है।
रात में खेतों और घरों की रखवाली बनी मजबूरी
हाथियों के डर के कारण ग्रामीणों का रात का पहरा अब मजबूरी बन गया है। किसी के हाथ में टॉर्च रहती है तो कोई घर और खेतों के आसपास लगातार निगरानी करता नजर आता है। किसान दिनभर खेतों में काम करने के बाद रात में अपनी फसल की रखवाली करने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि फसल बर्बाद होने से सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं होता, बल्कि छोटे और सीमांत किसानों के सामने परिवार की आजीविका का संकट खड़ा हो जाता है।
रनिया क्षेत्र में दर्जनभर हाथियों का झुंड सक्रिय
रनिया प्रखंड इस समय हाथियों की समस्या से सबसे अधिक प्रभावित बताया जा रहा है। करीब दर्जनभर जंगली हाथियों का झुंड पिछले कई दिनों से गांवों और खेतों के आसपास घूम रहा है। हाथियों की लगातार मौजूदगी से ग्रामीणों की दिनचर्या पूरी तरह बदल गई है।
ग्रामीणों के अनुसार, हाथियों का झुंड गांव की ओर बढ़ता दिखाई देने पर दहशत फैल जाती है। इसके बावजूद घरों और फसलों को बचाने के लिए ग्रामीण एकजुट होकर हाथियों को दूर भगाने का प्रयास करते हैं। इस दौरान उन्हें हाथियों के करीब जाने का जोखिम भी उठाना पड़ता है।
जयपुर गांव में रात नौ बजे पहुंचा हाथियों का झुंड
पिछले दो-तीन दिनों में हाथियों द्वारा किसी घर को नुकसान पहुंचाने की सूचना नहीं है, लेकिन खेतों में खड़ी फसलों को लगातार नुकसान हो रहा है। मंगलवार और बुधवार की रात जयपुर गांव में हाथियों की सक्रियता से अफरा-तफरी मच गई।
बुधवार रात करीब नौ बजे हाथियों का झुंड गांव की ओर बढ़ा। इसके बाद ग्रामीणों ने एकजुट होकर हाथियों को गांव से दूर केलो गांव की दिशा में खदेड़ने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद हाथियों को गांव से बाहर करने में ग्रामीण सफल हुए।
दो किसानों की फसल रौंदी, केलो में भी नुकसान
हाथियों को खदेड़ने के दौरान जयपुर गांव के किसान नोएल कंडुलना और सुशील डाहंगा की फसलें हाथियों के पैरों तले रौंद दी गईं। इससे दोनों किसानों को काफी नुकसान हुआ।
ग्रामीणों के मुताबिक, केलो गांव के खक्सीटोली और गड़ाहातू में भी कई किसानों की फसलों को हाथियों ने नुकसान पहुंचाया है। ग्रामीणों को आशंका है कि हाथियों का झुंड इसी तरह सक्रिय रहा तो आने वाले दिनों में फसल नुकसान और बढ़ सकता है।
सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों को सुरक्षित तरीके से गांवों से दूर रखने के लिए वन विभाग को प्रभावी व्यवस्था करनी चाहिए। उनका आरोप है कि संकट के समय पर्याप्त विभागीय मदद नहीं मिल पाने के कारण उन्हें खुद ही जोखिम उठाकर हाथियों को भगाना पड़ता है।
ग्रामीणों ने हाथियों से सुरक्षा के साथ-साथ फसल नुकसान का उचित आकलन कर मुआवजा देने की मांग की है।
नुकसान का आकलन कर विधायक को दी जाएगी जानकारी
विधायक प्रतिनिधि सुरेश कोगाड़ी ने बताया कि वे हाथी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर ग्रामीणों से स्थिति की जानकारी लेंगे। इसके बाद फसलों को हुए नुकसान का आकलन कर इसकी जानकारी विधायक सुदीप गुड़िया को दी जाएगी।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि हाथियों का झुंड लगातार गांव और खेतों के आसपास सक्रिय रहा तो उनकी जान और फसल दोनों पर खतरा बना रहेगा। ऐसे में वन विभाग से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई है।






