रिनपास में अब मिलेगी विश्वस्तरीय मानसिक स्वास्थ्य सुविधा, स्थापित हुई अत्याधुनिक डीटीएमएस मशीन

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–रोटरी क्लब रांची और सीसीएल की संयुक्त पहल, 17 जून को होगा उद्घाटन

रांची, 15 जून । मानसिक स्वास्थ्य उपचार के क्षेत्र में झारखंड को बड़ी सौगात मिलने जा रही है। रोटरी क्लब रांची और सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) के संयुक्त प्रयास से रांची इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो-साइकियाट्री एंड एलाइड साइंसेज़ (रिनपास) में अत्याधुनिक डीप ट्रांसक्रैनियल मैग्नेटिक स्टिम्युलेशन (डीटीएमएस) मशीन स्थापित की गई है। करोड़ों रुपये की लागत से लगाई गई यह मशीन मानसिक रोगों के उपचार में नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करेगी।

17 जून को स्वास्थ्य मंत्री करेंगे उद्घाटन

इस अत्याधुनिक मशीन का उद्घाटन 17 जून को किया जाएगा। उद्घाटन समारोह में झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम में विधायक सुरेश कुमार बैठा, रोटरी गवर्नर नम्रता तथा सीसीएल के वरिष्ठ अधिकारी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

मानसिक स्वास्थ्य उपचार में नई क्रांति लाएगी डीटीएमएस तकनीक

प्रोजेक्ट चेयरमैन एवं पूर्व रोटरी अध्यक्ष गौरव बागरॉय ने बताया कि एफडीए अनुमोदित डीटीएमएस तकनीक मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देगी। यह मशीन विश्व की अग्रणी न्यूरोमॉड्यूलेशन कंपनी द्वारा विकसित की गई है और मानसिक एवं व्यवहारिक विकारों के उपचार के लिए अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित है।

उन्होंने बताया कि यह एक सुरक्षित और गैर-आक्रामक उपचार पद्धति है, जिसमें शक्तिशाली चुंबकीय तरंगों के माध्यम से मस्तिष्क के प्रभावित हिस्सों को सक्रिय किया जाता है। इससे मानसिक रोगों के उपचार में बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

दर्दरहित और सुरक्षित है उपचार प्रक्रिया

रोटरी क्लब रांची के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने कहा कि डीटीएमएस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता इसकी दर्दरहित और सुरक्षित उपचार प्रक्रिया है। एक सामान्य सत्र लगभग 20 से 30 मिनट का होता है और उपचार के तुरंत बाद मरीज अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट सकता है।

उन्होंने बताया कि यह तकनीक मस्तिष्क के गहरे हिस्सों तक प्रभावी रूप से पहुंचकर उपचार करती है, जिससे पारंपरिक पद्धतियों की तुलना में बेहतर परिणाम मिलने की संभावना रहती है।

अवसाद, चिंता और नशा मुक्ति उपचार में भी होगी मदद

विशेषज्ञों के अनुसार डीटीएमएस तकनीक अवसाद (डिप्रेशन), चिंता विकार (एंग्जायटी डिसऑर्डर), धूम्रपान एवं निकोटीन की लत और नशा मुक्ति उपचार में भी प्रभावी साबित हो सकती है। यह उन मरीजों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, जिन्हें पारंपरिक दवाओं से अपेक्षित लाभ नहीं मिला है।

झारखंड के मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए मील का पत्थर

रोटरी इमेज चेयरमैन प्रवीण राजगढ़िया ने कहा कि यह पहल झारखंड और पूर्वी भारत के मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इस सुविधा के शुरू होने से गंभीर मानसिक रोगों से जूझ रहे मरीजों को अब राज्य के भीतर ही विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध हो सकेगा और उन्हें बड़े महानगरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

प्रेस वार्ता के दौरान ललित त्रिपाठी और जसदीप सिंह भी उपस्थित रहे।

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