रांची, 22 सितंबर । झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने मंगलवार को रांची के लोक भवन में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के तहत भारत में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विभिन्न देशों के विद्यार्थियों और शोधार्थियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने भारत की ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर चर्चा की।
भारत की ज्ञान परंपरा ने दुनिया को किया आकर्षित
राज्यपाल ने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही ज्ञान और शिक्षा की भूमि रहा है। तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला जैसे प्राचीन शिक्षा केंद्रों में दुनिया के विभिन्न हिस्सों से विद्यार्थी ज्ञान अर्जित करने आते थे।
उन्होंने कहा कि ज्ञान और विचारों के आदान-प्रदान की यह परंपरा आज भी भारत को प्रेरित करती है और विभिन्न देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
विदेशी विद्यार्थियों से मजबूत होते शैक्षणिक और सांस्कृतिक संबंध
संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, इराक सहित अफ्रीकी और मध्य-पूर्व के देशों के विद्यार्थियों का भारत में अध्ययन करना मजबूत शैक्षणिक और सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि भारत ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के सिद्धांत में विश्वास करता है। ज्ञान, शिक्षा और संवाद देशों के बीच मजबूत सेतु का काम करते हैं।
शांति और सद्भाव के भारतीय मूल्यों का किया उल्लेख
राज्यपाल ने कहा कि भगवान बुद्ध और भगवान महावीर की धरती भारत ने दुनिया को शांति, करुणा, अहिंसा और सद्भाव का संदेश दिया है। वर्तमान समय में इन मूल्यों की प्रासंगिकता और बढ़ गई है।
उन्होंने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय सहयोग का महत्व लगातार बढ़ रहा है और भारत ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का किया उल्लेख
राज्यपाल ने नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वैश्विक स्तर पर भारत की सक्रिय सहभागिता को दर्शाता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका और विभिन्न देशों के साथ सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
विदेशी विद्यार्थियों से झारखंड को जानने की अपील
झारखंड की चर्चा करते हुए राज्यपाल ने विदेशी विद्यार्थियों से राज्य की जनजातीय संस्कृति और प्राकृतिक संपदा को करीब से समझने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि झारखंड अपने जंगलों, पहाड़ों और झरनों के साथ समृद्ध सांस्कृतिक विरासत वाला राज्य है।
उन्होंने कहा कि झारखंड भगवान बिरसा मुंडा सहित अनेक स्वतंत्रता सेनानियों की भूमि रही है। राज्य की जनजातीय परंपराओं और संस्कृति को समझना विदेशी विद्यार्थियों के लिए भारत को जानने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
भारत और अन्य देशों के बीच सेतु हैं विद्यार्थी
राज्यपाल ने कहा कि विदेशी विद्यार्थी भारत और अपने देशों के बीच मित्रता एवं आपसी समझ के सेतु हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से भारत के इतिहास, संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों को समझने तथा यहां प्राप्त अनुभवों को अपने-अपने देशों में साझा करने की अपील की।






