राजधानी दिल्ली में सजेगा जनजातीय लोगों की कला-संस्कृति, गीत-संगीत और उद्यम का अनूठा मंच

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नई दिल्ली। जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक विरासत की अनूठी छटा के लिए राजधानी वासी तैयार हो जाए। मार्च के महीने में जनजातीय कार्य मंत्रालय ने पांच कार्यक्रमों का आयोजित करने जा रहा है। इनमें त्रावणकोर पैलेस में ट्राइब्स आर्ट फेस्ट (टीएएफ), भारत ट्राइब्स फेस्ट 2026, लिविंग रूट्स फेस्टिवल , जनजातीय व्यापार सम्मेलन, राष्ट्रीय सीएसआर शिखर सम्मेलन शामिल है।

शनिवार को नेश्नल मीडिया सेंटर में आयोजित पत्रकार वार्ता में जनजातीय मामलों के मंत्रीजुएल ओराम ने कहा कि राजधानी में आयोजित होने जा रहे इन कार्यक्रमों के माध्यम से जनजातीय विरासत को संरक्षित करने, रचनात्मक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने, उद्यमशीलता को मजबूत करने, बाजार पहुंच का विस्तार करने के साथ सतत जनजातीय विकास के लिए कॉर्पोरेट साझेदारी को बढाने में मदद मिलेगी। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने ट्राइब्स आर्ट फेस्ट, लिविंग रूट्स फेस्टिवल – साउंडस्केप्स ऑफ ट्राइबल इंडिया और भारत ट्राइब्स फेस्ट 2026 के लोगो का औपचारिक अनावरण भी किया।

इस मौके पर जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री दुर्गादास उइके, सचिव रंजना चोपड़ा, संयुक्त सचिव अनंत प्रकाश पांडे, टीआरआईएफईडी के प्रबंध निदेशक एम. राजा मुरुगन और पीआईबी के धर्मेंद्र तिवारी भी उपस्थित थे।

ट्राइब्स आर्ट फेस्ट (टीएएफ) 2026 से 02-13 मार्च त्रावणकोर पैलेस में आयोजित होगा जिसमें 70 से अधिक प्रख्यात आदिवासी कलाकार एक साथ आएंगे। देश भर की 30 अलग-अलग आदिवासी कला शैलियों की लगभग 1,000 कलाकृतियों का प्रदर्शन करेंगे। टीएएफ में सुनियोजित भ्रमण, लाइव पेंटिंग प्रदर्शन, सचित्र वार्ता, मार्गदर्शन कार्यशालाएं, सहभागिता सत्र और पैनल चर्चाएं होंगी जो कलाकारों, क्यूरेटरों, डिजाइनरों और संग्राहकों को एक साथ लाएंगी। यह प्रदर्शनी कलाकारों द्वारा बनाई गई पेंटिंग की सीधी बिक्री को भी सुगम बना रही है, जिससे आगंतुक और संग्राहक कलाकृतियों को सीधे रचनाकारों से खरीद सकते हैं।

लिविंग रूट्स फेस्टिवल और आदिवासी संगीत की धुनें 13-15 मार्च से बीकानेर हाउस और इंडिया गेट में आयोजित किए जाएंगे। यह तीन दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आदिवासी संगीत को एक समकालीन, सम्मानित और आर्थिक रूप से व्यवहार्य सांस्कृतिक शक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए बनाया गया है, साथ ही साथ सामुदायिक स्वामित्व को भी बनाए रखेगा। बीकानेर हाउस में दिन के सत्र (दोपहर 1:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक) में मुख्य भाषण, आकर्षक प्रदर्शन, संरक्षण और नवाचार पर पैनल चर्चाएँ होंगी।

भारत ट्राइब्स फेस्ट 18-30 मार्च तक सुंदर नर्सरी में आयोजित होगा। यह फेस्ट राष्ट्रीय बाज़ार और सांस्कृतिक मंच के रूप में कार्य करेगा, जिसमें 1,000 से अधिक आदिवासी कारीगर, वन धन विकास केंद्र, आदिवासी रसोइये और सांस्कृतिक मंडलियाँ भाग लेंगी और 200 से अधिक चुनिंदा स्टालों में कला, शिल्प और व्यंजन प्रदर्शित करेंगी। प्रमुख आकर्षणों में उच्च श्रेणी के आदिवासी उत्पादों को प्रदर्शित करने वाला सिग्नेचर पवेलियन और आदिवासी फैशन और शिल्प को प्रीमियम और वैश्विक बाजारों में स्थापित करने के उद्देश्य से मंत्रालय के “रीसा” ब्रांड का शुभारंभ शामिल है। एक अंतर्राष्ट्रीय पवेलियन ऑस्ट्रेलिया, फिजी और वियतनाम जैसे देशों के स्वदेशी कारीगरों की मेजबानी करेगा, जिससे वैश्विक आदिवासी समन्वय को बढ़ावा मिलेगा। 21 राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाला ट्राइबल फूड कोर्ट, लाइव प्रदर्शन और विभिन्न राज्यों के शाम के सांस्कृतिक कार्यक्रम ऐसे अनुभवात्मक क्षेत्र बनाएंगे जो सांस्कृतिक आदान-प्रदान और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करेंगे। यह महोत्सव आदिवासी उत्पादकों के लिए प्रत्यक्ष बाजार पहुंच को सक्षम बनाने और आय प्राप्ति में सुधार करने के लिए बनाया गया है।

जनजातीय व्यापार सम्मेलन: भारत ट्राइब्स फेस्ट 2026 का एक प्रमुख स्तंभ 14 दिवसीय राष्ट्रीय व्यापार सम्मेलन होगा, जिसका उद्देश्य जनजातीय उद्यमिता को बढ़ावा देना और जनजातीय उद्यमों को घरेलू और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत करना है। सम्मेलन में वन-आधारित खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं, टिकाऊ वस्त्रों और हस्तशिल्पों, नैतिक विलासिता की स्थिति निर्धारण, नवाचार और प्रौद्योगिकी एकीकरण, कौशल विकास और रोजगार के अवसर, बौद्धिक संपदा संरक्षण और पारंपरिक ज्ञान के नैतिक व्यावसायीकरण तथा समुदाय-आधारित पर्यटन मॉडलों पर केंद्रित सत्र आयोजित किए जाएंगे।

24 मार्च 2026 को एक राष्ट्रीय सीएसआर शिखर सम्मेलन का आयोजित होगा, जिसमें कॉरपोरेट जगत के नेताओं, सीएसआर प्रमुखों, कार्यान्वयन भागीदारों और राज्य जनजातीय कल्याण विभागों को एक साझा मंच पर लाया जाएगा। इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य उन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को प्रस्तुत करना है जिनमें सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिसोर्स) सहायता की आवश्यकता है, जनजातीय विकास में योगदान देने वाले कॉर्पोरेट भागीदारों को मान्यता देना और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप संरचित सहयोग को बढ़ावा देना है। शिखर सम्मेलन में कॉर्पोरेट भागीदारी और उपहार देने के लिए जनजातीय उत्पादों की शिल्पकारी और क्षमता का प्रदर्शन भी किया जाएगा।

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