बिहार में शिक्षा का नवाचार: डिजिटल स्टोरीज़ और सामुदायिक सहभागिता से बदल रही सीखने की तस्वीर

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नईदिल्ली : शिक्षा विभाग, बिहार सरकार द्वारा संचालित “CAMaL का कैम्प – समर कैम्प 2026” राज्य के लाखों बच्चों के लिए सीखने, रचनात्मकता और आत्मविश्वास के नए अवसर लेकर आया है। यह अभिनव पहल बच्चों की बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक दक्षताओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ सीखने को आनंददायक और सहभागितापूर्ण बनाने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त कर रही है।

मंगलवार को विक्रम विरकर (IAS), निदेशक, प्राथमिक शिक्षा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्यभर में संचालित समर कैम्पों की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में सभी क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, जिला एवं प्रखंड स्तरीय नोडल पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

समीक्षा के दौरान बताया गया कि राज्य के सभी 38 जिलों, 534 प्रखंडों एवं लगभग 28,986 मध्य विद्यालयों को इस अभियान से जोड़ा गया है। हजारों समर कैम्पों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चे उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं, जहाँ शिक्षा सेवक, तालिमी मरकज, स्वयंसेवक एवं स्थानीय युवा मिलकर बच्चों के लिए सीखने का जीवंत वातावरण तैयार कर रहे हैं।

निदेशक प्राथमिक शिक्षा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और निपुण भारत मिशन की भावना के अनुरूप यह कार्यक्रम विशेष रूप से कक्षा 5 से 6 में जाने वाले बच्चों की बुनियादी दक्षताओं को मजबूत करने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गर्मी की छुट्टियों को सीखने के सुनहरे अवसर में बदलते हुए बच्चों को ऐसे अनुभव प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे विद्यालय खुलने पर वे अधिक आत्मविश्वास और बेहतर तैयारी के साथ अपनी पढ़ाई आगे बढ़ा सकें।

समर कैम्प की सबसे बड़ी विशेषता बच्चों के लिए विकसित किया गया आनंदमय शिक्षण वातावरण है। बच्चे डिजिटल कहानियों को बड़े उत्साह से देख और सुन रहे हैं, जिनके माध्यम से वे भाषा, कल्पनाशक्ति और अभिव्यक्ति कौशल को सहज रूप से विकसित कर रहे हैं। कहानियों पर आधारित चर्चा, चित्रांकन, लेखन गतिविधियाँ और भूमिका-अभिनय बच्चों की रचनात्मकता को नई दिशा दे रहे हैं।

कैम्पों में खेल-आधारित गणितीय गतिविधियाँ, समूह कार्य, पठन-अभ्यास तथा सहभागितापूर्ण शिक्षण पद्धतियाँ बच्चों को सीखने के प्रति आकर्षित कर रही हैं। प्रारंभिक फीडबैक से स्पष्ट है कि बच्चों में पढ़ने की रुचि बढ़ी है, वे अधिक आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रख रहे हैं और सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।

बैठक में स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण, गतिविधि पुस्तिकाओं की उपलब्धता, डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग तथा बच्चों की नियमित उपस्थिति की भी समीक्षा की गई। निदेशक महोदय ने सभी जिलों को निर्देश दिया कि प्रत्येक कैम्प में बच्चों को सीखने के अधिकतम अवसर उपलब्ध कराए जाएँ तथा नवाचारी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए।

श्री विरकर ने जिला एवं प्रखंड स्तर के अधिकारियों, शिक्षा सेवकों, स्वयंसेवकों तथा सहयोगी संस्थाओं के समर्पित प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि “CAMaL का कैम्प – समर कैम्प 2026” केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सामुदायिक सहभागिता का एक सशक्त अभियान बन चुका है। उन्होंने कहा कि राज्यभर से प्राप्त सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि यह पहल बच्चों के सीखने के स्तर में गुणात्मक सुधार लाने की दिशा में प्रभावी भूमिका निभा रही है।

समर कैम्प के से बच्चों की बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान और मजबूत हो रहा है तथा गुणवत्तापूर्ण विद्यालयी शिक्षा की मजबूत नींव तैयार करेगा। बिहार में शिक्षा सुधार की दिशा में यह पहल एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभर रही है।

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