पटना : बिहार सरकार ने राज्य की 8463 पैक्स समितियों को ग्रामीण विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के नए मॉडल के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार अब पैक्सों को सिर्फ कृषि ऋण देने वाली संस्था तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें बहुउद्देशीय और आत्मनिर्भर इकाई के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।
सहकारिता मंत्री Ramkripal Yadav ने विभागीय अधिकारियों के साथ पहली समीक्षा बैठक में कई अहम निर्देश दिए। बैठक में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने और गांवों में रोजगार सृजन पर विशेष जोर दिया गया।
सरकार की योजना के तहत अब पैक्सों के माध्यम से डेयरी और मत्स्य पालन गतिविधियों को भी बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जाएगा। हर पैक्स में डेयरी सहकारी समिति और मत्स्य सहकारी समिति गठित करने की तैयारी की जा रही है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त आय और रोजगार के अवसर पैदा हो सकें।
इसके साथ ही धान, गेहूं और अन्य अनाजों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद व्यवस्था को और मजबूत करने की रणनीति बनाई गई है। सरकार का मानना है कि मजबूत सहकारी नेटवर्क के जरिए किसानों को उनकी उपज का उचित दाम और सीधा लाभ मिल सकेगा।
बैठक में कृषि ऋण वितरण को आसान बनाने और ग्रामीण आत्मनिर्भरता के लिए विशेष एक्शन प्लान तैयार करने पर भी चर्चा हुई। सरकार अगले साल तक सभी पैक्सों के पूर्ण कंप्यूटरीकरण का लक्ष्य लेकर चल रही है, जिससे कामकाज में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी।
राज्य के करीब 1 करोड़ 25 लाख पैक्स सदस्यों को प्रशिक्षण देने की भी तैयारी है। इसके जरिए आधुनिक कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन और सहकारी प्रबंधन की जानकारी दी जाएगी।
सरकार महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और युवाओं को सहकारिता से जोड़कर रोजगार उपलब्ध कराने पर भी फोकस कर रही है। सरकार का दावा है कि पैक्सों को मजबूत और आधुनिक बनाकर गांवों में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी तथा किसानों की आय में सुधार होगा।






