पंचायतों के लिए केंद्र की ₹2,254 करोड़ राशि पर सियासत तेज, भानु प्रताप बोले- राज्य में चल रही ‘कट-कमीशन’ सरकार

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रांची, 08 अप्रैल । रांची में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही ने केंद्र सरकार से झारखंड को मिले फंड के उपयोग पर राज्य सरकार के रवैये पर सवाल उठाए हैं।

केंद्र से मिला 2254 करोड़ का फंड

भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में शाही ने कहा कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने झारखंड की 4342 पंचायतों के विकास के लिए 2254 करोड़ रुपये भेजे हैं। उन्होंने इसे राज्य गठन के बाद ग्रामीण विकास के लिए सबसे बड़ी एकमुश्त राशि बताया।

हर पंचायत को मिलेंगे करीब 52 लाख रुपये

शाही के अनुसार, इस राशि से प्रत्येक पंचायत को लगभग 52 लाख रुपये मिलेंगे, जिससे गांवों में स्कूल, अस्पताल, सड़क और पंचायत भवन जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जा सकेगा।

“एमबीए” सिंडिकेट पर लगाया आरोप

उन्होंने राज्य सरकार पर “कट-कमीशन” वाली व्यवस्था चलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में “एमबीए” (मंत्री, बिचौलिया, अधिकारी) का एक सिंडिकेट सक्रिय है, जिसकी नजर पंचायत फंड पर है और इससे विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

33 हजार करोड़ खर्च न होने का आरोप

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि पिछले वित्तीय वर्ष में करीब 33,000 करोड़ रुपये खर्च नहीं हो सके और उन्हें सरेंडर करना पड़ा, जो सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है।

आवास योजना और नल-जल पर भी सवाल

शाही ने कहा कि राज्य सरकार ने 8 लाख ‘अबुआ आवास’ बनाने का वादा किया था, लेकिन पांच वर्षों में एक भी आवास पूरा नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अब केंद्र की पीएम आवास योजना की सूची को ‘अबुआ आवास’ में शामिल करने का दबाव बना रही है।

नल-जल योजना पर भी उन्होंने कहा कि झारखंड इस मामले में देश में नीचे से दूसरे स्थान पर है और अब तक केवल 55 प्रतिशत लक्ष्य ही पूरा हुआ है, जबकि गांवों में बनी पानी टंकियां केवल दिखावा बनकर रह गई हैं।

आदिम जनजाति योजना पर भी उठाए सवाल

शाही ने कहा कि आदिम जनजातियों के लिए केंद्र द्वारा भेजी गई 2050 करोड़ रुपये की पीएम जन-मन योजना में भी खर्च की स्थिति संतोषजनक नहीं है।

केंद्र-राज्य संबंधों पर बयान

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र पर सौतेले व्यवहार का आरोप लगाती है, जबकि मोदी सरकार के 11 वर्षों में झारखंड को मिलने वाले ग्रांट फंड में 16 गुना तक वृद्धि हुई है।

पारदर्शिता की अपील, आंदोलन की चेतावनी

अंत में भानु प्रताप शाही ने पंचायत प्रतिनिधियों—मुखिया, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्यों से अपील की कि वे फंड के उपयोग पर नजर रखें और पारदर्शिता सुनिश्चित करें।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पंचायतों को आवंटित राशि में किसी प्रकार की गड़बड़ी या ‘कट-कमीशन’ का खेल हुआ, तो भाजपा इसके खिलाफ आंदोलन करेगी।

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