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दुर्गा पूजा रांची: 150 करोड़ की भव्य तैयारियां, 60 करोड़ पंडालों पर खर्च

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राजधानी रांची में इस बार दुर्गा पूजा का आयोजन बड़े पैमाने पर, खर्च का आंकड़ा 150 करोड़ रुपये के पार

रांची: झारखंड की राजधानी रांची इस साल दुर्गा पूजा के आयोजन में नए आयाम गढ़ रही है। प्रशासन और पूजा समितियों के अनुमान के मुताबिक, पूरे जिले में करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से दुर्गोत्सव का आयोजन हो रहा है। इस खर्च में पंडाल निर्माण, मूर्ति निर्माण, लाइटिंग, सजावट और प्रबंधन के तमाम पहलू शामिल हैं।

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375 जगहों पर दुर्गा पूजा का आयोजन

रांची जिला दुर्गापूजा समिति के रिकॉर्ड के अनुसार, इस बार राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में 375 स्थानों पर दुर्गा पूजा का आयोजन हो रहा है।

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  • रांची शहरी क्षेत्र में 135 पूजा समितियां सक्रिय हैं।
  • ग्रामीण और औद्योगिक इलाकों में 240 समितियां दुर्गोत्सव मना रही हैं।

पूरे जिले में भव्यता और आस्था का संगम देखने को मिलेगा।

खर्च का पूरा ब्योरा

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  • पूजा पंडाल: 60 करोड़ रुपये
  • मूर्ति निर्माण: 20 करोड़ रुपये
  • लाइटिंग और सजावट: 30 करोड़ रुपये
  • पूजा प्रबंधन और अन्य खर्च: 40 करोड़ रुपये

यानी कुल 150 करोड़ रुपये का यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक भव्यता को दर्शाता है बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी वरदान साबित हो रहा है।

सबसे महंगे पंडाल

रांची में इस बार कई पूजा समितियां भव्य और थीम-आधारित पंडाल तैयार कर रही हैं। इनमें कुछ सबसे महंगे पंडाल हैं:

  • श्रीरामलला दुर्गा पूजा समिति – 90 लाख रुपये की लागत से भव्य पंडाल, आयोजन पर कुल खर्च लगभग 1 करोड़ रुपये।
  • भारतीय युवक संघ, बकरी बाजार – 70 लाख रुपये का पंडाल, आयोजन पर कुल 90 लाख रुपये का अनुमान।
  • आर.आर. स्पोर्टिंग क्लब – करीब 78 लाख रुपये खर्च।
  • हरमू पंच मंदिर पूजा समिति – 70 लाख रुपये खर्च।
  • रांची रेलवे स्टेशन पूजा समिति – लगभग 60 लाख रुपये का आयोजन।

थीम-आधारित और मंदिरों की प्रतिकृति वाले पंडाल

इस बार रांची के कई पंडाल देश और विदेश के प्रसिद्ध मंदिरों की तर्ज पर बनाए जा रहे हैं।

  • कहीं दक्षिण भारत के मंदिरों की झलक होगी।
  • कहीं राजस्थान और बंगाल की कला की छाप दिखाई देगी।
  • कई समितियां पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संदेशों पर आधारित थीम को अपनाए हुए हैं।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा

इतने बड़े पैमाने पर खर्च का असर स्थानीय बाजारों पर भी साफ दिख रहा है।

  • मूर्तिकार, बढ़ई, बिजली मिस्त्री, डेकोरेटर और कारीगरों को बड़े पैमाने पर काम मिला है।
  • कपड़े, गहनों, खान-पान और पर्यटन से जुड़े कारोबारियों की बिक्री में भी इजाफा होने की उम्मीद है।
  • पूजा समितियों का कहना है कि दुर्गा पूजा अब सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं रहा बल्कि रांची की पहचान और आर्थिक गतिविधि का बड़ा हिस्सा बन चुका है।

सुरक्षा और प्रबंधन

बड़ी भीड़ और खर्च को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।

  • पंडालों के आसपास पुलिस बल की तैनाती होगी।
  • ट्रैफिक प्रबंधन के लिए विशेष योजना बनाई गई है।
  • भीड़ नियंत्रण के लिए सीसीटीवी और कंट्रोल रूम की व्यवस्था की जा रही है।

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