रांची, 22 सितंबर । झारखंड में आगामी त्योहारों को देखते हुए राज्य सरकार ने सोना-सोबरन धोती-साड़ी योजना के तहत वस्त्र वितरण की प्रक्रिया तेज कर दी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में राज्य के करीब 68 लाख गरीब परिवारों के बीच वस्त्रों का वितरण किया जाएगा। खाद्य एवं उपभोक्ता मामले निदेशालय ने इस संबंध में सभी जिलों के उपायुक्तों को पत्र भेजकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
तीन दिनों के भीतर आपूर्ति आदेश जारी करने का निर्देश
खाद्य एवं उपभोक्ता मामले निदेशालय ने निर्देश दिया है कि आपूर्ति आदेश प्राप्त होने के तीन दिनों के भीतर आपूर्तिकर्ता को डीलरवार आपूर्ति आदेश जारी किया जाए, ताकि जरूरतमंद लाभुकों तक समय पर वस्त्र पहुंचाए जा सकें।
निदेशालय ने जिलों को वितरण प्रक्रिया में तेजी लाने और निर्धारित समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
प्रत्येक लाभुक परिवार को मिलेगी साड़ी और धोती या लुंगी
सोना-सोबरन योजना के प्रावधानों के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और झारखंड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के प्रत्येक लाभुक परिवार को एक साड़ी और एक धोती अथवा लुंगी उपलब्ध कराई जाएगी।
धोती और लुंगी के वितरण का अनुपात 60:40 निर्धारित किया गया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली और दूसरी छमाही के लिए वस्त्रों की आपूर्ति का जिम्मा जेम पोर्टल के माध्यम से मेसर्स मफतलाल इंडस्ट्रीज लिमिटेड को दिया गया है।
प्रति वस्त्र 10 रुपये लिए जाएंगे
जनवितरण प्रणाली दुकानदार लाभुकों से प्रति वस्त्र 10 रुपये की राशि लेंगे। इसमें से एक रुपये प्रति वस्त्र डीलर का कमीशन और दो रुपये प्रति वस्त्र परिवहन खर्च के रूप में दुकानदार के पास रहेंगे।
शेष सात रुपये प्रति वस्त्र की राशि आपूर्ति पदाधिकारी के कार्यालय में जमा करानी होगी। वस्त्र वितरण की निगरानी के लिए जिला स्तर पर कमेटियों का गठन भी किया गया है।
पुराने बचे वस्त्रों का होगा मिलान
जिलावार आपूर्ति आदेश तैयार करते समय वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में बचे हुए और वितरित नहीं किए गए वस्त्रों का आंकड़ा मिलाया जाएगा।
ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज वितरण रिपोर्ट के आधार पर बची हुई साड़ियों, धोतियों और लुंगियों की संख्या को नए आवंटन से घटाया जाएगा। इसके बाद शुद्ध मांग के आधार पर ही आपूर्ति आदेश तैयार किया जाएगा।
निदेशालय ने निर्देश दिया है कि आपूर्ति आदेश में संबंधित गोदाम का नाम और पता स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाए और इसे तीन दिनों के भीतर आपूर्तिकर्ता को भेजना अनिवार्य होगा।
16 जिलों का प्रदर्शन राज्य औसत से बेहतर
खाद्य निदेशालय ने 31 अगस्त 2026 तक के वस्त्र वितरण आंकड़ों की समीक्षा की है। इसके अनुसार राज्य में औसत वितरण 83.60 प्रतिशत रहा।
राज्य औसत से बेहतर प्रदर्शन करने वाले 16 जिलों में लोहरदगा, खूंटी, लातेहार, दुमका, कोडरमा, पाकुड़, रामगढ़, जामताड़ा, देवघर, सिमडेगा, हजारीबाग, पलामू, चतरा, गुमला, गिरिडीह और साहिबगंज शामिल हैं।
वहीं आठ जिलों का प्रदर्शन राज्य औसत से नीचे रहा है। इन जिलों को वितरण कार्य में तेजी लाने और निर्धारित लक्ष्य को समय पर पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
गुणवत्ता जांच के बाद ही होगा वितरण
वस्त्रों की गुणवत्ता और वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भी विस्तृत व्यवस्था की गई है। प्रखंड स्तर पर कपड़ों की शत-प्रतिशत प्राप्ति के 48 घंटे के भीतर बीडीओ को रैंडम आधार पर साड़ी, धोती और लुंगी के नमूने सीलबंद करने होंगे।
सीलबंद नमूनों को जिला आपूर्ति पदाधिकारी के माध्यम से विशेष दूत के जरिए सरकारी प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता जांच के लिए भेजा जाएगा। इसके लिए विभिन्न राज्यों की टेक्सटाइल कमेटी से जुड़ी सरकारी प्रयोगशालाओं में जांच कराई जाएगी।
लैब रिपोर्ट सही मिलने के बाद शुरू होगा वितरण
निदेशालय के निर्देश के मुताबिक, वस्त्रों की गुणवत्ता जांच की रिपोर्ट सही पाए जाने के बाद ही उन्हें लाभुकों के बीच वितरित किया जा सकेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य लाभुकों को निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण साड़ी, धोती और लुंगी उपलब्ध कराना है।
त्योहारों से पहले करीब 68 लाख परिवारों तक वस्त्र पहुंचाने के लक्ष्य को देखते हुए जिलों को आपूर्ति, गुणवत्ता जांच और वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है।






