रांची, 24 जुलाई। झारखंड सरकार मरीजों के हितों की सुरक्षा और निजी अस्पतालों में उपचार शुल्क की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार जल्द ही आईसीयू सहित विभिन्न उपचारों की दरें तय करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू करेगी।
उन्होंने कहा कि एसओपी लागू होने के बाद निजी अस्पताल मनमाने ढंग से इलाज का शुल्क नहीं वसूल सकेंगे और मरीजों को उपचार की दरों में अधिक पारदर्शिता मिलेगी।
निजी अस्पतालों की मनमानी फीस पर लगेगा अंकुश
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद राज्य में निजी अस्पतालों की मनमानी फीस पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय विशेष रूप से आम, गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित होगा, जिन्हें गंभीर बीमारी या आपातकालीन उपचार के दौरान अत्यधिक चिकित्सा खर्च का सामना करना पड़ता है।
पारदर्शी और जवाबदेह स्वास्थ्य व्यवस्था पर जोर
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य सभी मरीजों को पारदर्शी, सुलभ और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि इलाज के दौरान आर्थिक शोषण की किसी भी आशंका को समाप्त करना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से उपचार शुल्क को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में यह पहल की जा रही है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में जारी हैं सुधार
डॉ. अंसारी ने कहा कि झारखंड सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए लगातार कार्य कर रही है। मरीजों के अधिकारों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक जवाबदेह, जनहितैषी तथा आम लोगों की जरूरतों के अनुरूप बनाया जा रहा है।
जल्द होगा एक और बड़ा फैसला
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार मरीजों के हित में जल्द ही एक और महत्वपूर्ण तथा ऐतिहासिक निर्णय लेने जा रही है, जिसकी घोषणा उचित समय पर की जाएगी।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना नहीं, बल्कि उन्हें अधिक पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और आमजन की पहुंच के भीतर बनाना भी है।
मरीजों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता
डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि जनता का विश्वास सरकार की सबसे बड़ी ताकत है। इसी विश्वास के आधार पर स्वास्थ्य क्षेत्र में लगातार सुधारात्मक और नीतिगत कदम उठाए जा रहे हैं तथा भविष्य में भी मरीजों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।






