रांची, 24 जुलाई। ज्ञान विज्ञान समिति, झारखंड द्वारा राज्य के 18 जिलों में कराए गए बेरोजगारी सर्वेक्षण में रोजगार की स्थिति को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। अगस्त–सितंबर 2025 के दौरान 4,678 लोगों पर किए गए इस सर्वेक्षण में 71 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने बताया कि वे रोजगार की तलाश में हैं, जबकि 15 प्रतिशत लोग पढ़ाई कर रहे हैं। शेष उत्तरदाता खेती, अनियमित मजदूरी या छोटे-मोटे स्वरोजगार से जुड़े हैं।
सर्वेक्षण की रिपोर्ट शुक्रवार को रांची प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान जारी की गई।
96 प्रतिशत शिक्षित, फिर भी रोजगार का संकट
समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. काशीनाथ चटर्जी ने बताया कि सर्वेक्षण में 2,735 पुरुष और 1,943 महिलाएं शामिल थीं। इनमें 96 प्रतिशत उत्तरदाता शिक्षित हैं, लेकिन अधिकांश युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार नहीं मिल पा रहा है।
रोजगार मिलने की उम्मीद कम
रिपोर्ट के अनुसार, 49 प्रतिशत लोगों का मानना है कि अच्छे रोजगार की संभावना बहुत कम है, जबकि 21 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि रोजगार मिलने की उम्मीद लगभग समाप्त हो चुकी है।
सर्वेक्षण में शामिल 95 प्रतिशत से अधिक लोगों ने माना कि समय के साथ राज्य में बेरोजगारी की स्थिति और गंभीर होती जा रही है।
पलायन बढ़ने की जताई चिंता
डॉ. काशीनाथ चटर्जी ने कहा कि रोजगार के सीमित अवसरों के कारण झारखंड से पलायन बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षित युवाओं को भी कम वेतन और अस्थायी रोजगार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
रोजगार सृजन के लिए रखे सुझाव
समिति ने राज्य सरकार से कृषि, कृषि आधारित उद्योग, कुटीर उद्योग और स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग की। साथ ही सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति करने और गिग वर्करों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने की भी आवश्यकता बताई।
सरकार को सौंपा जाएगा नीति-परामर्श
समिति ने कहा कि सर्वेक्षण के निष्कर्षों के आधार पर राज्य सरकार को रोजगार सृजन से संबंधित विस्तृत नीति-परामर्श सौंपा जाएगा। इसके साथ ही रोजगार के मुद्दे पर राज्यव्यापी जनसंवाद अभियान भी चलाया जाएगा।
प्रेस वार्ता में राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य रवि सिंह, राज्य अध्यक्ष शिव शंकर, राज्य उपाध्यक्ष हेमंत जायसवाल, राज्य महासचिव विश्वनाथ सिंह, राज्य कोषाध्यक्ष सुरेंद्र ठाकुर तथा धनबाद जिला सचिव भोलाराम भी उपस्थित थे।






