खनन, शराब, जमीन और नियुक्ति घोटालों को लेकर सरकार पर बरसे बाबूलाल मरांडी, बोले-राज्य की एजेंसियों से निष्पक्ष जांच संभव नहीं

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रांची, 03 सितंबर। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य में सामने आए कथित घोटालों को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले छह-सात वर्षों में सामने आए कई बड़े घोटालों में मुख्यमंत्री और उनके करीबियों के नाम सामने आए हैं। ऐसे में इन मामलों की जांच राज्य की एजेंसियों से निष्पक्ष तरीके से कराया जाना संभव नहीं है।

साहिबगंज के कथित घोटाले का किया जिक्र

बाबूलाल मरांडी ने गुरुवार को सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि साहिबगंज में 1,200 करोड़ रुपये से अधिक के कथित घोटाले में मुख्यमंत्री के विधायक प्रतिनिधि मुख्य आरोपित हैं। उन्होंने शराब घोटाले का जिक्र करते हुए दावा किया कि इसमें मुख्यमंत्री के पूर्व सचिव विनय चौबे को मुख्य सूत्रधार बताया गया है।

जेएसएससी-सीजीएल नियुक्ति मामले पर भी उठाए सवाल

भाजपा नेता ने जेएसएससी-सीजीएल नियुक्ति मामले को लेकर भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि नौकरी बेचने के मामले में मुख्यमंत्री के मित्र और मुख्यमंत्री आवास से जुड़े लोगों की भूमिका के आरोप सामने आए हैं।

जमीन घोटाले का उल्लेख करते हुए मरांडी ने कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री के खिलाफ आरोप गठन की प्रक्रिया तक पहुंच चुकी है।

खनन लीज और ट्रांसफर-पोस्टिंग पर भी आरोप

बाबूलाल मरांडी ने पद के दुरुपयोग कर खनन लीज लेने के मामले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य में बालू, पत्थर, कोयला और लौह अयस्क से लेकर ट्रांसफर-पोस्टिंग और नियुक्तियों तक भ्रष्टाचार के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं।

एसीबी और सीआईडी की निष्पक्षता पर सवाल

राज्य की जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए मरांडी ने कहा कि जब किसी मामले के तार मुख्यमंत्री तक पहुंचने के आरोप हों, तो एसीबी और सीआईडी जैसी एजेंसियां निष्पक्ष जांच कैसे कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में मामलों की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए।

शराब और नियुक्ति घोटाले की जांच पर निशाना

मरांडी ने शराब घोटाले में एसीबी की कार्रवाई और नियुक्ति घोटाले में सीआईडी की जांच को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि शराब घोटाले में एसीबी ने चार्जशीट दाखिल नहीं की, जबकि नियुक्ति घोटाले में सीआईडी की जांच की दिशा बदल दी गई।

सीबीआई जांच की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इन सभी गंभीर मामलों की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए। उनके अनुसार, स्वतंत्र एजेंसी से जांच होने पर ही निष्पक्षता सुनिश्चित हो सकेगी और जनता का जांच प्रक्रिया पर भरोसा कायम रहेगा।

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