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कम बारिश की आशंका पर सरकार अलर्ट, कृषि मंत्री का निर्देश-किसानों के हितों से समझौता नहीं, लापरवाही पर सख्त कार्रवाई

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रांची, 12 मई । झारखंड की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के उत्थान को लेकर पूरी तरह गंभीर है और इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसानों के हित में बेहतर कार्य करने वालों को सम्मान मिलेगा, जबकि लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कृषि मंत्री मंगलवार को रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित खरीफ कर्मशाला 2026 के दूसरे दिन अधिकारियों को संबोधित कर रही थीं।

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कम बारिश और सूखे की आशंका पर सरकार सतर्क

शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष मानसून में कम बारिश होने की संभावना है, जिससे सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसे देखते हुए राज्य सरकार पहले से तैयारी कर किसानों को राहत पहुंचाने की दिशा में कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि सूखे से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पहले ही पूरी कर ली जाएं। किसानों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से ही इस खरीफ कर्मशाला का आयोजन किया गया है।

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जिलों को तैयारी की विस्तृत योजना बनाने का निर्देश

कृषि मंत्री ने कहा कि सभी जिलों के कृषि पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सूखे की स्थिति से निपटने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करें, जिसे इस कर्मशाला में प्रस्तुत किया गया है।

उन्होंने कहा कि किसानों के लिए समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि समय पर बीज और सिंचाई की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी तो सारी मेहनत बेकार हो जाएगी।

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“सेना की तरह काम करें अधिकारी”

शिल्पी तिर्की ने अधिकारियों से कहा कि वे किसानों के लिए एक सेना की तरह काम करें। जिला कृषि पदाधिकारी को नोडल पदाधिकारी बनाते हुए कृषि विभाग से जुड़े सभी अधिकारी एक्शन मोड में कार्य करें।

उन्होंने निर्देश दिया कि 15 मई को जिला स्तरीय बैठक आयोजित की जाए, जिसमें प्रखंड स्तर के अधिकारी भी शामिल हों। कर्मशाला में साझा की गई योजनाओं की जानकारी सभी अधिकारियों तक पहुंचाई जाए और इसकी रिपोर्ट राज्य के नोडल पदाधिकारी को भेजी जाए।

20 मई को हर जिले में लगेगा खरीफ मेला

कृषि मंत्री ने बताया कि 20 मई को राज्य के प्रत्येक जिले में खरीफ मेला आयोजित किया जाएगा, जिसमें 500 प्रगतिशील किसान भाग लेंगे।

उन्होंने निर्देश दिया कि हर प्रखंड से किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। साथ ही 22 मई को प्रखंड स्तर पर भी खरीफ मेला आयोजित करने और प्रत्येक पंचायत से 50-50 प्रगतिशील किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा।

पशु दवा, तालाब जीर्णोद्धार और सोलर पंप पर जोर

शिल्पी नेहा तिर्की ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पशुओं की दवाइयों का वितरण समय पर हो और इससे संबंधित निविदा प्रक्रिया भी समय पर पूरी की जाए।

उन्होंने कहा कि मई माह के अंत तक तालाबों के जीर्णोद्धार का कार्य पूरा कर लिया जाए। इसके अलावा भूमि संरक्षण, सोलर पंप वितरण और मधुमक्खी पालन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी सख्ती से अमल करने का निर्देश दिया।

जल संरक्षण और वैकल्पिक आय पर जोर

कर्मशाला में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति एससी दुबे ने कहा कि जल संरक्षण की दिशा में गंभीरता से काम करने की जरूरत है।

उन्होंने किसानों को आय के वैकल्पिक साधनों को अपनाने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया और कहा कि जिला कृषि पदाधिकारियों को अपने जिले की कृषि से जुड़ी सभी जानकारियां अद्यतन रखनी चाहिए।

दो दिवसीय खरीफ कर्मशाला के दूसरे दिन धान की विभिन्न किस्मों के चयन और सूखे की आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों को लेकर जानकारी दी गई। इस दौरान संबंधित विषय पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी प्रदर्शित की गई।

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