उतर कोयल परियोजना उच्च विद्यालय बचाने के लिए जनआंदोलन तेज

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पलामू। पलामू के मोहम्मदगंज प्रखंड क्षेत्र का उतर कोयल परियोजना उच्च विद्यालय अस्तित्व का संकट झेल रहा है। उच्च विद्यालय को बंद होने से बचाने के लिए प्रखंड क्षेत्र के ग्रामीण मुखर हो रहे हैं। विद्यालय के लाभुक ग्रामीण और पंचायत प्रतिनिधियों की गुरूवार को हुई बैठक में सर्वसम्मति से उतर कोयल परियोजना उच्च विद्यालय बचाओ संघर्ष समिति का गठन किया गया। तिरंगे के समक्ष विद्यालय को बंद होने से बचाने की शपथ ली गयी।

गठित समिति में अशोक यादव संरक्षक, अश्विनी कुमार सिंह अध्यक्ष, गणेश प्रसाद, धीरेंद्र कुमार उपाध्यक्ष, महेन्द्र प्रसाद सिंह महासचिव, पचु रजवार, नगीना सिंह सचिव, मिथलेश सिंह कोषाध्यक्ष, नित्यानन्द पाठक सह कोषाध्यक्ष, राकेश सिंह, कुंदन चौरसिया, शम्भू चौरसिया, रविशंकर सिंह, अनूप कुमार मीडिया प्रभारी, रामदेव मेहता को कानूनी सलाहकार, विवेक विशाल कार्यक्रम संयोजक, रविकांत कुमार, आरुष राजपूत, रौशन मेहता आईटी सेल के अलावा उमेश राम, रामबचन बैठा सहित अन्य को कार्यकारिणी सदस्य बनाये गये।

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि विद्यालय को शिक्षा विभाग में अधिग्रहण करने की मांग को लेकर प्रखंड, अनुमंडल एवं जिला स्तर के बाद राज्य स्तर के अधिकारियों को शिष्टमंडल की ओर से क्रमशः ज्ञापन दिया जाएगा।

बिहार और झारखंड राज्य के सिंचाई विभाग के अधिकारियों को भी विद्यालय के अस्तित्व संकट से अवगत कराया जाएगा। शिष्टमंडल क्षेत्रीय विधायक, सांसद उसके बाद राज्य के शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री से मिलकर विद्यालय को बचाने के लिए ज्ञापन देकर निवेदन करेगा।

उल्लेखनीय है कि विद्यालय वर्तमान में गंभीर संकट से गुजर रहा है और बंद होने के कगार पर है। यह विद्यालय वर्ष 1985 में उतर कोयल सिंचाई परियोजना परिसर में सिंचाई कर्मियों एवं स्थानीय ग्रामीण बच्चों की शिक्षा के लिए स्थापित किया गया था तथा वर्ष 1986 में उपशिक्षा निदेशक, बिहार सरकार द्वारा स्थापना की अनुमति प्रदान की गई थी।

विद्यालय का संचालन जल संसाधन विभाग, बिहार सरकार की ओर से किया जाता रहा। बिहार-झारखंड राज्य विभाजन के पश्चात अन्य परियोजना विद्यालयों (इंद्रपुरी, तेनुघाट, कोसी, बीरपुर, बाल्मीकिनगर ) को संबंधित राज्य के शिक्षा विभाग की ओर से अधिग्रहित कर लिया गया, लेकिन उतर कोयल परियोजना विद्यालय आज तक शिक्षा विभाग में अधिग्रहित नहीं हो सका है।

वर्तमान में विद्यालय में मात्र एक शिक्षक (प्रधानाध्यापक प्रभार) कार्यरत हैं, जो वर्ष 2027 में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इसके बाद विद्यालय का संचालन पूर्णतः असंभव हो जाएगा। विद्यालय की ओर से वर्ष 2011 से लगातार शिक्षा विभाग में अधिग्रहण के लिए पत्राचार किया जाता रहा है, परंतु अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। पूर्व में विद्यालय शैक्षणिक दृष्टि से अत्यंत उत्कृष्ट रहा है, जहां नौ शिक्षक, दो चतुर्थवर्गीय कर्मी एवं एकरात्रि प्रहरी कार्यरत थे। कक्षा 7 से 10 तक की पढ़ाई होती थी।

उल्लेखनीय है कि इस स्कूल का मैट्रिक परीक्षा परिणाम उत्कृष्ट रहा है। 12 किमी के दायरे में कोई अन्य उच्च विद्यालय उपलब्ध नहीं था। पलामू एवं गढ़वा जिले के कई प्रखंडों से छात्र-छात्राएं अध्ययन करते थे। विद्यालय के पास आज भी स्वयं का भवन, चहारदीवारी, खेल मैदान, शौचालय, पेयजल एवं अन्य आधारभूत संरचनाएं उपलब्ध हैं।

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